रायगढ़। प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी एक सूत्रीय मांग को लेकर मंगलवार से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। जिससे रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सामने करीब 63 इंटर्न डॉक्टरों ने एकजूूट होकर धरना-प्रदर्शन करते हुए सरकार से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की है।
उल्लेखनीय है विगत सप्ताहभर से मेडिकल कालेज के इंटर्न डाक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, इसके तहत अभी तक काली पट्टी लगाकर काम कर रहे थे, लेकिन इस दौरान इनकी मांगों पर विचार नहीं होने से मंगलवार को सुबह से ही अस्पताल के मुख्य गेट पर बैठकर अनिश्चतकालीन धरना शुरू कर दिया है। आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में मिलने वाला स्टाइपेंड बेहद कम है, जबकि पड़ोसी राज्यों ओडिशा, पश्चिम बंगाल सहित कई अन्य राज्यों में एमबीबीएस इंटर्न को अधिक और सम्मानजनक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। उनकी मांग है कि राज्य सरकार इंटर्न डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार रुपये किया जाए।
साथ ही उनका कहना था कि इस मांग को लेकर पहले भी कई बार शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी बात रख चुके हैं। लेकिन उस दौरान भी उन्हें आश्वासन दिया गया था कि उनकी मांग पर विचार किया जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी वजह से अब प्रदेशभर के इंटर्न डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाया है। साथ ही उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाएगा, तब तक इनका आंदोलन जारी रहेगा।
उल्लेखनीय है कि रायगढ़ मेडिकल कालेज वर्तमान स्थिति में 62 इंटर्न डाक्टर है, जो मेडिकल कालेज अस्पताल सहित जिले के पीएचसी-सीएचसी में अपनी सेवाएं दे रहे है, लेकिन इसके बाद भी इस महंगाई के दौरान जो उनको स्टाइपेंड मिल रहा है, उससे उनका खर्च नहीं चल रहा है, वहीं अन्य राज्यों की तरह यहां भी स्टाइपेंड होना चाहिए, ताकि दिक्कतों का सामना न कराना पड़े। ऐसे में अपनी मांगों को लेकर मंगलवार से सभी भावी डाक्टर एक जुट होकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है और कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर जल्द निर्णय ले, ताकि वे पुन: अपनी ड्यूटी पर लौट कर मरीजों को बेहतर सेवा दे सके।
क्या कहते हैं अधिकारी
मेडिकल कालेज के डीन डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप एक वर्ष का अनिवार्य प्रशिक्षण होता है। इंटर्न डॉक्टर अभी छात्र की श्रेणी में हैं जिससे उनको प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन से मरीजों के उपचार और अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।



