रायगढ़। जिले के चिरईपानी गांव में पिछले करीब एक महीने से बंदरों का आतंक बना हुआ है। आक्रामक बंदर अब तक 10 से अधिक ग्रामीणों को काट या नोंच चुके हैं। सबसे ज्यादा महिलाएं हमलों का शिकार हुई हैं।
मामले की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग ने गांव में बंदरों को पकडऩे के लिए चार पिंजरे लगाए हैं। हालांकि, इनमें छोटे बंदर तो फंस रहे हैं, लेकिन लोगों पर हमला करने वाले बड़े और आक्रामक बंदर अभी भी पकड़ में नहीं आए हैं। करीब एक सप्ताह पहले गांव की रहने वाली कमला पंडा घर से नहाने के लिए नाले की ओर जा रही थीं। इसी दौरान पीछे से आए बंदरों ने उन पर हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनके सिर में 12 टांके लगाने पड़े। शुक्रवार को गांव के श्याम सुंदर डनसेना पर भी बंदरों ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में डर का माहौल है और लोग घर से बाहर निकलने में भी सतर्कता बरत रहे हैं। गांव के नटराज डनसेना ने बताया कि बंदर काफी आक्रामक हैं और लगातार लोगों पर हमला कर रहे थे। हालांकि, पिछले दो दिनों से कोई नई घटना सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि वन विभाग के लगाए गए पिंजरों में अब तक 8 से 10 छोटे बंदर पकड़े जा चुके हैं, जिन्हें जंगल में छोड़ दिया गया है। लेकिन हमला करने वाले बड़े बंदर अब भी पिंजरे में नहीं फंस रहे हैं।
वन विभाग रख रहा नजर
रायगढ़ वन परिक्षेत्र अधिकारी संजय लकड़ा ने बताया कि सूचना मिलते ही गांव में चार पिंजरे लगाए गए हैं। कुछ बंदरों को पकड़ लिया गया है और विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है। कोशिश की जा रही है कि आक्रामक बंदरों को भी जल्द पकड़ लिया जाए, ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।



