रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ बिलासपुर की रायगढ़ घराने की कथक नृत्यांगना अंजनी मिश्रा की मनमोहक प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने कृष्ण वंदना के साथ कथक की प्रस्तुति आरंभ की। भावपूर्ण अभिनय, आकर्षक पद संचालन और लय-ताल के सधे हुए समन्वय ने मंच पर ऐसा वातावरण रचा कि दर्शक पूरी प्रस्तुति के दौरान मंत्रमुग्ध रहे।
अंजनी मिश्रा ने राजा चक्रधर सिंह की रचनाओं पर आधारित घाट, उपोड़धा, परण, पैरों की तिहाई, चालन, भाव, गतभाव एवं कवित्त की प्रस्तुतियां दीं। कथक की बारीकियों, भावाभिव्यक्ति और पद संचालन के माध्यम से उन्होंने रायगढ़ घराने की विशिष्ट नृत्य परंपरा को प्रभावी ढंग से मंच पर जीवंत किया। प्रस्तुति में तकनीकी पक्ष के साथ भाव और अभिनय का सुंदर संतुलन देखने को मिला। कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रस्तुत ठुमरी ने सांस्कृतिक संध्या को भावपूर्ण विराम दिया। अंजिनी मिश्रा के साथ तबले पर गुरु भूपेंद्र बरेठ और गायन पर गुरु साहिल ने संगत प्रदान की। तबले की सधी हुई थाप, गायन के सुर और कथक की लयकारी के सुंदर मेल ने प्रस्तुति को और प्रभावशाली बना दिया।
तीन वर्ष की उम्र से शुरू हुई नृत्य साधना
अंजनी मिश्रा ने महज तीन वर्ष की उम्र से नृत्य साधना प्रारंभ की। पिछले 15 वर्षों से वे संगीत नाटक अकादमी रत्न एवं पद्मश्री सम्मानित पंडित रामलाल बरेठ तथा उनके सुपुत्र गुरु भूपेंद्र बरेठ से कथक की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। अपनी निरंतर कला साधना के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर कथक की प्रस्तुतियां दी हैं। इनमें मलेशिया सहित विदेशों के मंच भी शामिल हैं। अंजनी मिश्रा भारत सरकार की सीसीआरटी छात्रवृत्ति प्राप्त कलाकार भी हैं। चक्रधर समारोह के मंच पर अपनी पहली प्रस्तुति में उन्होंने अपनी कला साधना के साथ रायगढ़ घराने की समृद्ध कथक परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा और राजा चक्रधर सिंह की संगीत एवं नृत्य साधना की विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
शार्वी सिंह परिहार ने कथक की दी मनमोहक प्रस्तुति

रायगढ़। 41 वें चक्रधर समारोह-2026 की पांचवी सांस्कृतिक संध्या में युवा कथक नृत्यांगना शार्वी सिंह परिहार ने मनमोहक कथक प्रस्तुति दी। समारोह में शार्वी ने उठान और ‘कर्पूरगौरं करुणावतारं’ पर आधारित शिव वंदना से शुरुआत की।
इसके बाद ठाट, गदनिक, तोड़ा-तुकड़ा, परन, लड़ी, तिहाई और चक्रदार तोड़ों के माध्यम से कथक की शास्त्रीय बारीकियों को प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा।
बाल्यावस्था से ही कथक की साधना कर रहीं शार्वी पिछले करीब 12 वर्षों से इस विधा का प्रशिक्षण ले रही हैं। वे गुरु तरुण कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में लखनऊ घराने की कथक परंपरा सीख रही हैं। शार्वी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। चक्रधर समारोह में भी वे पूर्व में समूह और एकल कथक प्रस्तुति दे चुकी हैं।
डॉ. मंजू ईलांग्बाम की मणिपुरी नृत्य में दिखा भाव, लय का मनोहारी संगम

रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह-2026 की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति से यादगार बन गई। प्रतिष्ठित मणिपुरी नृत्यांगना डॉ. मंजू ईलांग्बाम ने अपनी भावपूर्ण और लयबद्ध प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति में मणिपुरी नृत्य की शास्त्रीय गरिमा, कोमलता और भाव-अभिनय का सुंदर समन्वय देखने को मिला। प्रस्तुति के दौरान उनकी सहज पदचाल, भाव-भंगिमाओं और लयकारी ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। मणिपुरी नृत्य की पारंपरिक शैली को उन्होंने अपनी प्रभावशाली नृत्याभिव्यक्ति के माध्यम से जीवंत किया। प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से कलाकार का उत्साहवर्धन किया।
डॉ. मंजू ईलांग्बाम मणिपुरी शास्त्रीय नृत्यांगना, कोरियोग्राफर और शोधकर्ता हैं। उन्होंने विश्व-भारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन से मणिपुरी नृत्य में स्वर्ण पदक के साथ पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्हें संगीत नाटक अकादमी उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार तथा मणिपुर राज्य कला अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इस अवसर पर इरोम रॉबर्ट सिंह ने तालवाद्य, मायोंगबाम प्रियानी देवी ने गायन एवं संगीत तथा लाइमायुम नेल्सन शर्मा ने सितार वादन से संगत दी। कलाकारों की प्रभावी संगत ने प्रस्तुति की सुंदरता को और निखार दिया।
अनंता पांडेय ने दी कथक की प्रस्तुति

41वें चक्रधर समारोह-2026 की पांचवी सांस्कृतिक संध्या में युवा नृत्यांगना अनंता पांडेय ने कथक की प्रस्तुति दी। उन्होंने भाव, लय और ताल के साथ कथक नृत्य प्रस्तुत किया। प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। अनंता ने 8 वर्ष की उम्र से मंच पर नृत्य करना शुरू किया। थाईलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नृत्य चौम्पियनशिप में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने पुरस्कार हासिल किए हैं। वर्ष 2019 में अनंता ने पांच बच्चों के साथ भवप्रीता डांस एकेडमी की शुरुआत की। वर्तमान में वे बच्चों को कथक, सेमी-क्लासिकल और वेस्टर्न डांस का प्रशिक्षण दे रही हैं। वे इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में अध्ययनरत हैं। नृत्य के क्षेत्र में उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
श्वेता नायक एंड ग्रुप ने कुचिपुड़ी नृत्य से मोहा दर्शकों का मन

रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह की सांस्कृतिक संध्या में बिलासपुर की श्वेता नायक एंड ग्रुप ने कुचिपुड़ी नृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘शिवशक्ति समर्पण’ शीर्षक से प्रस्तुत इस नृत्य में भगवान शिव के तांडव और माता पार्वती के लास्य का मनोहारी संगम देखने को मिला। प्रस्तुति में भक्ति, शक्ति, सौंदर्य और लय का सुंदर समावेश रहा। कार्यक्रम का आरंभ ‘मीनाक्षी पंचरत्नम्’ से हुआ। रागमालिका और आदि ताल में प्रस्तुत इस रचना के माध्यम से देवी मीनाक्षी के दिव्य स्वरूप, सौंदर्य और महिमा को कुचिपुड़ी की भावपूर्ण अभिव्यक्ति में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद ‘तरंगम’ की प्रस्तुति ने दर्शकों का विशेष आकर्षण खींचा। थाली पर संतुलित नृत्य, जटिल पदसंचालन, लय और भाव के अद्भुत समन्वय ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया। ‘शिवशक्ति समर्पण’ में भगवान शिव के गंगाधर, चंद्रचूड़ और आनंद नटराज स्वरूपों का भावपूर्ण निरूपण किया गया। गंगा के शिव की जटाओं में अवतरण और भगवान शिव द्वारा लोककल्याण के लिए गंगा को अपनी जटाओं में धारण करने के प्रसंग को नृत्य के माध्यम से जीवंत किया गया। गुरु श्वेता नायक के निर्देशन में डी. धारणी, श्री दिप्ता पॉल, चेतन्या साहू, मेघा सारथी, ऐश्वर्या, श्वेता सालिनी नायक, एन. स्तुति रेड्डी, एन. दिव्यांका, हर्षिता कैवर्त सहित कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
डॉ.खुशबू पांचाल के कथक ने मोहा मन

41वें चक्रधर समारोह-2026 की सांस्कृतिक संध्या में उज्जैन की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना एवं नृत्य निर्देशक डॉ. खुशबू पांचाल ने अपनी शानदार कथक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति में कथक की बारीकियों, भाव-भंगिमाओं, लय, ताल और पदसंचालन का सुंदर समन्वय देखने को मिला। उन्होंने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से कथक की शास्त्रीय गरिमा और भाव-सौंदर्य को प्रभावी ढंग से मंच पर साकार किया। सहज भावाभिव्यक्ति, आकर्षक पदचालन और लयकारी ने प्रस्तुति को विशेष बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से कलाकार का उत्साहवर्धन किया।
डॉ. खुशबू पांचाल पिछले तीन दशकों से कथक की साधना, प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार से जुड़ी हैं। वे नृत्य साधना नृत्य मंदिर की संस्थापिका एवं निदेशिका तथा नृत्याराधना संगीत एवं कला महाविद्यालय, उज्जैन की प्राचार्य हैं। उन्होंने खजुराहो नृत्य समारोह, मोढेरा महोत्सव और अखिल भारतीय कालिदास समारोह सहित देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर कथक की प्रस्तुतियां दी हैं। चक्रधर समारोह के मंच पर उनकी प्रस्तुति ने कथक की समृद्ध परंपरा, भाव, संगीत और लय की खूबसूरती को दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया। प्रस्तुति के समापन पर दर्शकों ने कलाकार का उत्साहपूर्वक अभिनंदन किया।
सूफी संगीत की मिठास और कबीर वाणी से गूंजा समारोह

41वें चक्रधर समारोह की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री डॉ. भारती बंधु ने सूफी संगीत, कबीर वाणी और भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। गणेश वंदना के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में ‘बोलो राम राम’, ‘राधे-राधे’ और ‘राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट’ जैसे भक्ति गीतों ने श्रोताओं को जोड़े रखा। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। भारती बंधु ने कबीर के दोहों और पदों को भी अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत किया। ‘कबीरा बिगड़ गए राम दुहाई’, ‘छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाई के’, ‘मेरा पिया घर आया, ओ राम जी’ और ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’ जैसे गीतों की प्रस्तुति हुई। कबीर की वाणी, सूफी संगीत और भक्ति गीतों की विविध प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक संध्या में संगीत की अलग-अलग परंपराओं का रंग देखने को मिला।
पांचवीं पीढ़ी से निभा रहे भक्ति संगीत की परंपरा
प्रस्तुति के दौरान डॉ. भारती बंधु ने चक्रधर समारोह से अपने पुराने जुड़ाव की बातें भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि वे समारोह को उसके शुरुआती दौर से जानते हैं।उन्होंने कहा कि समय के साथ समारोह का स्वरूप काफी विस्तृत हुआ है और आज इसमें शामिल होना गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि वे अपने परिवार में भक्ति संगीत की पांचवीं पीढ़ी से जुड़े हैं, जबकि उनके पुत्र छठी पीढ़ी के रूप में इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। 67 वर्षीय भारती बंधु ने बताया कि वे पिछले 57 वर्षों से गायन कर रहे हैं।
पद्मश्री सहित कई सम्मान प्राप्त
कबीर गायन की विशिष्ट शैली के लिए डॉ. भारती बंधु को वर्ष 2013 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। वर्ष 2020 में उन्हें छत्तीसगढ़ शासन का ‘चक्रधर सम्मान’ और वर्ष 2021 में मध्यप्रदेश शासन का ‘तुलसी सम्मान’ प्रदान किया गया। वर्ष 2015 में खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट्/डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की। डॉ. भारती बंधु देश-विदेश में 10 हजार से अधिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं।
कला के जरिए पीढिय़ों को जोड़ रहा चक्रधर समारोह- प्रभारी मंत्री नेताम

रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ शासन के कृषि मंत्री एवं रायगढ़ जिले के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद महाराजा चक्रधर सिंह के छायाचित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री श्री नेताम ने कहा कि चक्रधर समारोह कला के माध्यम से लोगों को जोडऩे वाला ऐसा मंच है, जहां कला प्रेमी, कलाकार और कला साधक एक साथ आते हैं। उन्होंने रायगढ़ के उन कला प्रेमियों और श्रोताओं को नमन किया, जो पूरी रात बैठकर विभिन्न प्रस्तुतियों का आनंद लेते हैं। उन्होंने कहा कि कला के प्रति रायगढ़ की यह निरंतर रुचि और समर्पण समारोह की विशेष पहचान है।
महाराजा चक्रधर सिंह की कला साधना को किया याद
प्रभारी मंत्री श्री नेताम ने कहा कि स्वर्गीय महाराजा चक्रधर सिंह ने संगीत और कला के माध्यम से रायगढ़ घराने की पहचान को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया। विशेष रूप से कथक नृत्य के क्षेत्र में उनके योगदान ने रायगढ़ को देश और दुनिया में अलग पहचान दिलाई। उनकी कला साधना से प्रेरित होकर चक्रधर समारोह आज भी कला की इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह की स्मृति में आयोजित यह समारोह केवल प्रस्तुतियों का मंच नहीं है, बल्कि कला और संस्कृति की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है। समारोह में प्रदेश के साथ देश के अलग-अलग क्षेत्रों से कलाकार शामिल होकर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।
पांचवें दिन के कलाकारों का किया सम्मान
मंत्री श्री नेताम ने पांचवें दिन प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने कलाकारों को उनकी प्रस्तुतियों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कलाकारों की साधना और कला प्रेमियों की सहभागिता से ही ऐसे आयोजन निरंतर आगे बढ़ते हैं। प्रभारी मंत्री ने कला प्रेमियों से समारोह में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाने और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। इस अवसर पर अरुणधर दीवान, श्रीकांत सोमावार, सुभाष पाण्डेय, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह सहित जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी, कलाकार और बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।
समारोह में अनुराग शर्मा ने बिखेरी सुरों की मिठास, छत्तीसगढ़ी लोकगीतों पर झूमे दर्शक

41 वें चक्रधर समारोह की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़े लोकप्रिय गायक, संगीतकार एवं अभिनेता अनुराग शर्मा ने अपनी सुरीली आवाज से लोकसंगीत की मनमोहक छटा बिखेरी। छत्तीसगढ़ी बोली, लोकधुन और माटी की खुशबू से सजे एक से बढक़र एक गीतों की प्रस्तुति ने समारोह के मंच को जीवंत कर दिया। अनुराग शर्मा के मधुर स्वरों के साथ दर्शक भी सुर और ताल में डूबे नजर आए। उनकी मधुर आवाज, भावपूर्ण गायन और छत्तीसगढ़ी लोकधुनों की मिठास ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। उनके गीतों पर दर्शक तालियों के साथ झूमते हुए नजर आए।
गायन के साथ संगीत और अभिनय में भी बनाई पहचान
अनुराग शर्मा छत्तीसगढ़ी कला और संगीत जगत के बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार हैं। गायन के साथ उन्होंने संगीत और अभिनय के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। अब तक उनकी 500 से अधिक लाइव प्रस्तुतियां हो चुकी हैं और उनके 1000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। फिल्म एवं एल्बम के लिए उन्हें 11 बार बेस्ट प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। अनुराग शर्मा ने छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत को देश के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी पहचान दिलाई है। उन्होंने अमेरिका के शिकागो में छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत की प्रस्तुति देकर अपनी कला का प्रदर्शन किया है।



