जांजगीर-चांपा। जिले के बहुचर्चित कार चालक रमाकांत तिवारी अपहरण, लूट एवं हत्या प्रकरण में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश जांजगीर ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने हत्या, अपहरण, लूट और साक्ष्य मिटाने जैसे गंभीर अपराधों में दोष सिद्ध होने पर तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही विभिन्न धाराओं के तहत अर्थदंड भी लगाया गया है।
लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर के अनुसार, घटना 13 अप्रैल 2024 की है। आरोपी विवेकपुरी गोस्वामी ने नए मोबाइल नंबर से सीजी-04-पीसी-1378 डिजायर कार को किराए पर बुक कराया था। कार चालक रमाकांत तिवारी रात करीब साढ़े दस बजे बिलासपुर से आरोपियों को लेकर अमरकंटक के लिए रवाना हुआ। रास्ते में पहले से बनाई गई साजिश के तहत आरोपियों ने गोरेला-पेंड्रा मार्ग पर खड़े होकर शौच जाने का बहाना बनाया। जैसे ही चालक वाहन से नीचे उतरा, आरोपियों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और जमीन पर गिराकर पत्थर से उसके सिर पर कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपियों ने शव को कार की पिछली सीट पर रखा और उसे ठिकाने लगाने के उद्देश्य से अपने परिचित प्रिंस उर्फ बजरंग के पास पहुंचे। इसके बाद शव को जांजगीर-चांपा जिले के सारागांव थाना क्षेत्र स्थित लर्खुरी नहर के समीप फेंक दिया गया तथा कार लेकर फरार हो गए। बाद में वाहन को बेचने और साक्ष्य मिटाने का भी प्रयास किया गया। अगले दिन चालक के परिजनों द्वारा संपर्क नहीं होने पर उसकी तलाश शुरू हुई। कार मालिक और परिजनों की सूचना पर पुलिस ने जांच प्रारंभ की। लर्खुरी नहर के पास एक अज्ञात शव मिलने की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, जहां शव की पहचान रमाकांत तिवारी के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोटों के कारण मृत्यु होना प्रमाणित हुआ।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल कॉल डिटेल, परिस्थितिजन्य साक्ष्य तथा गवाहों के बयान के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। पूछताछ में आरोपियों ने वारदात की योजना और क्रियान्वयन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य बताए। पुलिस ने अपराध में प्रयुक्त वाहन, मोबाइल तथा अन्य साक्ष्य भी जब्त किए।
विवेचना पूरी होने के बाद न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 15 गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। न्यायालय ने माना कि सभी साक्ष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं तथा अभियोजन आरोपियों के विरुद्ध अपराध सिद्ध करने में सफल रहा। न्यायालय ने यह भी माना कि तीनों आरोपियों ने साझा आपराधिक मंशा से चालक का अपहरण कर उसकी हत्या की, कार एवं अन्य सामान की लूट की तथा साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। न्यायालय ने आरोपी राहुल श्रीवास, सोमप्रभात साहू तथा विवेकपुरी गोस्वामी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं 10,000 अर्थदंड, धारा 397, 120-बी के तहत आजीवन कारावास एवं 10,000 अर्थदंड, धारा 364 के तहत आजीवन कारावास एवं 10,000 अर्थदंड तथा धारा 201 के तहत छह माह के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इस महत्वपूर्ण प्रकरण में शासन की ओर से लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर, जांजगीर ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर अभियोजन पक्ष न्यायालय में अपराध सिद्ध कराने में सफल रहा। न्यायालय के इस फैसले को गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावी विवेचना और सशक्त अभियोजन का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
कार चालक का अपहरण, लूट और हत्या के तीन दोषियों को आजीवन कारावास
प्रत्येक पर अर्थदंड भी लगाया, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश जांजगीर का महत्वपूर्ण फैसला



