रायगढ़। पितृ दिवस पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अपने पिता जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए आमजनो के समक्ष पिता के महत्व विस्तार से रखते हुए सोशल मंच पर विचार साझा करते हुए कहा बाबूजी! आप आज भी मेरे आसपास मौजूद हैं, मुझे हर कदम पर देख रहे हैं। आप एक आदर्श किसान, एक आदर्श शिक्षक और एक आदर्श पिता रहे। खेत में पसीना बहाकर आपने ष्कर्म को पूजा मानना सिखाया, और विद्यालय की चौपाल पर खड़े होकर आपने सत्य ही ईश्वर है का पाठ पढ़ाया।
ओपी ने कहा शास्त्र कहते हैं – मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव। अर्थात माता, पिता और गुरु तीनों ईश्वर के समान हैं। पिता वह वटवृक्ष है जो धूप-छांव, आंधी-तूफान सब सहकर अपनी संतान को छाया देता है। पिता की चुप्पी में जो फिक्र होती है, उसकी डांट में जो भविष्य की चिंता होती है, और उसकी मेहनत में जो नि:स्वार्थ त्याग होता है वो कोई और नहीं कर सकता। आप मेरे जीवन का संबल हैं, मेरा मान हैं, मेरा अभिमान हैं। आपने जो त्याग, संस्कार और नि:स्वार्थ प्यार दिया, वही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। जब जीवन की राह कठिन होती है, तो आपके दिए संस्कार ही दीपक बनकर रास्ता दिखाते हैं। पितृ दिवस को कैलेंडर का एक दिवस बताते हुई कहा पिता का ऋण जन्मान्तर नहीं उतर सकता। पिता से मिले संस्कारों को साझा करते हुए कहा ईमानदारी और मेहनत से काम में जुटे रहो। सेवा भाव समाज के लिए जियो जो समाज के लिए जिया वही आज अमर है। सत्य की राह कठिन है पर अंतिम विजय उसी की है। युवा पीढ़ी से आग्रह करते हुए मंत्री श्री ओपी ने कहा मोबाइल की स्क्रीन से समय निकालकर अपने पिता के पैर जरूर छुएं। माता पिता से नियमित संवाद को भी उन्होंने आवश्यक बताया।सनातन परंपरा में पितृ ऋण सबसे बड़ा ऋण माना गया है। पिता के आदर्शों पर चलकर, समाज सेवा करके इसे चुकाया जा सकता।
पितृ देवो भव: पिता ही प्रथम गुरु, प्रथम ईश्वर-ओपी
ओपी ने पिता से मिले संस्कार को बताया मुकुट



