जांजगीर-सक्ती। जहां सांप का नाम सुनते ही लोग रास्ता बदल लेते हैं, वहीं सक्ती जिले के ग्राम हरेठी की 19 वर्षीय निधि सोनी उसी दिशा में दौड़ पड़ती हैं। किसी घर में जहरीला नाग निकल आए, कुएं में कोई जीव फंस जाए या सडक़ किनारे कोई घायल पशु तड़प रहा हो, एक फोन कॉल पर पहुंचने वाली यह बेटी आज पूरे सक्ती जिले में बेजुबानों की ‘लाइफ सेवर’ के नाम से पहचानी जा रही है।
निधि सोनी की कहानी सिर्फ सांप पकडऩे की नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, साहस और निस्वार्थ सेवा की कहानी है। चूंकि, जिस उम्र में अधिकांश युवा अपने करियर और भविष्य की योजनाओं में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में निधि ने अपना जीवन बेजुबान जीवों की रक्षा और उपचार के लिए समर्पित कर दिया है।
मौत का डर नहीं, जिंदगी बचाने का जुनून
बरसात का मौसम शुरू होते ही गांवों और शहरों में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। अक्सर लोग डर के कारण सांपों को मार देते हैं। लेकिन निधि सोनी ऐसे हर सांप के लिए उम्मीद बनकर पहुंचती हैं। सूचना मिलते ही वह अपनी स्कूटी लेकर 25 से 30 किलोमीटर तक का सफर तय करती हैं और बिना किसी शुल्क के सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू करती हैं। इसके बाद उन्हें जंगल में उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ देती हैं। अब तक वह 100 से अधिक जहरीले सांपों का सफल रेस्क्यू कर चुकी हैं। घर, स्कूल, खेत, कुएं और सार्वजनिक स्थानों से सैकड़ों सांपों को सुरक्षित निकालकर उन्होंने न केवल लोगों को राहत दी है बल्कि, अनेक वन्य जीवों की जान भी बचाई है।
यूट्यूब से सीखी कला, सेवा से बनाई पहचान
निधि सोनी बताती हैं कि शुरुआत में वह अपने घर और आसपास निकलने वाले गैर जहरीले सांपों को पकडक़र सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया करती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने यूट्यूब के माध्यम से सर्पों की प्रजातियों, व्यवहार और सुरक्षित रेस्क्यू तकनीकों की जानकारी हासिल की। समय के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने जहरीले सांपों का भी रेस्क्यू शुरू कर दिया। आज उनकी पहचान एक निडर सर्प रेस्क्यूअर के रूप में बन चुकी है।
सांप ही नहीं, हर घायल जीव की मददगार
निधि सोनी का मिशन केवल सर्प संरक्षण तक सीमित नहीं है। सडक़ हादसों में घायल गाय, कुत्ते, बंदर और अन्य पशुओं को अस्पताल पहुंचाना, उनका इलाज कराना और स्वस्थ होने तक उनकी देखभाल करना भी उनके दैनिक जीवन का हिस्सा है। कई बार वह स्वयं पशु चिकित्सकों से संपर्क कर उपचार की व्यवस्था करवाती हैं और इलाज पूरा होने तक पशुओं की सेवा में जुटी रहती हैं। उनका कहना है कि किसी भी जीव का दर्द उन्हें बेचैन कर देता है और जब तक वह उसकी मदद नहीं कर लेतीं, उन्हें चैन नहीं मिलता।
कठिन संघर्षों से निकली सेवा की प्रेरणा
निधि सोनी की जिंदगी भी संघर्षों से भरी रही है। वर्ष 2007 में उनके पिता रामकुमार सोनी का निधन हो गया था। उस समय वह बहुत छोटी थीं। इसके बाद उनकी मां, जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, उन्होंने अकेले अपने तीनों बच्चों का पालन-पोषण किया। बड़ी बहन कुमकुम सोनी सहायक प्राध्यापक बनने की तैयारी कर रही हैं, जबकि भाई भूपति सोनी गैराज का संचालन करते हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद निधि ने अपने सपनों को जीवित रखा और सेवा का रास्ता चुना।
पढ़ाई के साथ ही सेवा कार्य भी जारी
12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद निधि वर्तमान में पशु चिकित्सा क्षेत्र की पढ़ाई कर रही हैं। उनका सपना भविष्य में वेटनरी क्षेत्र में विशेषज्ञ बनकर पशुओं की और अधिक प्रभावी सेवा करना है। वह मानती हैं कि सांप दुश्मन नहीं, बल्कि प्रकृति की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्हें मारना नहीं बल्कि, समझना और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना चाहिए।
सोशल मीडिया से गांव-गांव तक पहचान
डभरा, किरारी, रेड़ा, टुंडरी, रायपुरा, सक्ती सहित आसपास के कई गांवों में उनके सफल रेस्क्यू अभियान चर्चा का विषय बने हुए हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोग उनसे संपर्क कर मदद मांगते हैं। कई परिवार ऐसे हैं, जो समय पर पहुंचकर किए गए उनके रेस्क्यू कार्यों को आज भी याद करते हैं।
सोनी समाज और जिले का बढ़ा रहीं मान
निधि सोनी आज केवल अपने गांव या परिवार का नहीं, बल्कि पूरे सोनी समाज और सक्ती जिले का नाम रोशन कर रही हैं। उनकी निडरता, सेवा भावना और जीवों के प्रति प्रेम यह साबित करता है कि पहचान धन, पद या प्रसिद्धि से नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के लिए किए गए निस्वार्थ कार्यों से बनती है।
आने वाली पीढिय़ों को करती रहेगी प्रेरित
जब अधिकांश लोग सांप देखकर पत्थर उठाते हैं, तब निधि उसे नया जीवन देने का रास्ता चुनती हैं। जब कोई घायल बेजुबान दर्द से कराहता है, तब वह उसके लिए उम्मीद बनकर पहुंचती हैं। सक्ती की यह बेटी केवल सांपों का रेस्क्यू नहीं कर रही, बल्कि इंसानियत, संवेदनशीलता और जीव संरक्षण की ऐसी मिसाल गढ़ रही है, जो आने वाली पीढिय़ों को प्रेरित करती रहेगी।



