सारंगढ़। रामगोपाल गर्ग पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज के द्वारा पुलिस अधिकारियों लिए अपराध/मर्ग की विवेचना हेतु डीएनए एवं जैविक/भौतिक साक्ष्य संकलन एवं परीक्षण विषय पर रेंज स्तरीय एक दिवसीय कार्य शाला का ऑन लाईन आयोजन पुलिस महा निरीक्षक मीटिंग हाल में किया गया। कार्यशाला में भोज राम पटेल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली, विवेेक शर्मा उपपुलिसअधीक्षक आईजी कार्यालय बिलासुपर रेंज की उपस्थिति रही।कार्यक्रम शुभारंभ श्री गर्ग पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज के द्वारा किया गया।
अपराध विवेचना के दौरान हत्या, हत्या के प्रयास, बलात्कार के प्रकरणों में जप्त प्रदर्शों का ष्ठहृ्र एवं जैविक/भौतिक साक्ष्य संकलन, परीक्षण किया जाना होता है, जिस पर विवेचकों के द्वारा प्रदर्शो की जप्ती, सेंम्पलिंग के दौरान प्रकियात्मक त्रुटि की जा रही है।जिससे परीक्षण रिपोर्ट निष्क्रिय प्राप्त होने से आरोपी को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होता है तथा वे दोषमुक्त हो जाते हैं न्यायालय डीएनए. न केवल दोषियों को सजा दिलाने में मदद करता है, बल्कि निर्दोष व्यक्तियों को झूठे आरोपों से मुक्त करने में भी एक शक्तिशाली माध्यम है। इसे आधुनिक न्याय प्रणाली का गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है।
कार्यशाला दौरान डॉ प्रियंका लकड़़ा व डॉ स्वाति कुजूर वैज्ञानिकअधिकारी क्षेत्रीय विज्ञान प्रयोगशाला बिलासपुर द्वारा डीएनए एवं जैविक/भौतिक साक्ष्य संकलन, परीक्षण पर विभिन्न टॉपिक्स पर प्रकाश डाले। न्यायालयिक डीएनए पर डॉ प्रियंका लकड़़ा वैज्ञानिक अधिकारी द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन दिया गया – डीएनए. को न्याय का ब्लूप्रिंट कहा जाता है क्योंकि यह एक निर्णायक वैज्ञानिक उपकरण के रूप में कार्य करता है। यद्यपि मानव डीएनए. का 99.9 प्रतिशत हिस्सा सभी में समान होता है, लेकिन न्यायालयिक विज्ञान शेष 0.1 प्रतिशत भिन्नता का उपयोग व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने के लिए करता है। साक्ष्य के विविध स्रोतजैविक साक्ष्य के रूप में रक्त, लार, वीर्य, बाल की जड़ें, हड्डियाँ, दाँत और टच डीएनए का विश्लेषण किया जाता है।
इसका प्राथमिक उपयोग अपराधियों की पहचान करने, पितृत्व विवादों को हल करने और आपदाओं में अज्ञात शवों की पहचान करने के लिए होता है।निर्भया केस, तंदूर मर्डर केस और श्रद्धा वाकर केस जैसे मामलों में डीएनए. साक्ष्य सजा दिलाने में आधार बने। न्यायालयिक जीव विज्ञान पर डॉ. स्वाति कुजूर वैज्ञानिक अधिकारी द्वारा जानकारी सांझा की न्यायालयिक जीव विज्ञान वह शाखा है जहाँ अपराध स्थलों से प्राप्त जैविक नमूनों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर कानूनी जाँच में सहायता प्रदान की जाती है। प्रयोग शाला में सबसे पहले नमूनों का प्रारंभिक परीक्षण किया जाता है ता कि यह पुष्टि हो सके की पदार्थ जैविक (जैसे- रक्त या लार) है या नही वैज्ञानिक यह निर्धारित करते हैं कि प्राप्त जैविक नमूना मानव का है या किसी जानवर का। जीव विज्ञान शाखा के अंतर्गत मानव विज्ञान वनस्पति विज्ञान कीट विज्ञान जैसे विषय भी आते हैं जो मृत्यु के समय और कारण का पता लगाने में मदद करते हैं। अपराध स्थल से जैविक साक्ष्य का उचित संकलन न्याय की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है। यह विज्ञान न केवल दोषियों को पकडऩे में मदद करता है, बल्कि वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर निर्दोषों को गलत सजा से बचाने में भी सहायक है। डी.एन.ए. साक्ष्य एवं जप्त प्रदर्श बहुत संवेदनशील होते हैं। नमी, अधिक तापमान और बैक्टीरिया इन्हें नष्ट कर सकते हैं। इसलिए, साक्ष्यों को प्लास्टिक के बजाय कागज के बैग में पैक करना और उन्हें सूखा रखना अनिवार्य है। साक्ष्य संकलन के दौरान चेन ऑफ कस्टडी का पालन करना कानूनी रूप से आवश्यक है। प्रशिक्षण के अंत में अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए एक प्रश्नोत्तर काल रखा गया जिसमें अधिकारियों द्वारा विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयॉ प्रस्तुत की गई जिस पर डॉ प्रियंका लकड़़ा एवं डॉ स्वाति कुजूर वैज्ञानिक अधिकारी द्वारा प्रदर्शो की जप्ती व सेंम्प्लिंग में आने वाली समस्याओं का समाधान किया गया। पुलिस महानिरीक्षक द्वारा इस कार्यशाला का आयोजन जप्त प्रदर्शो की परीक्षण में आने वाली समस्याओं के समाधान हेतु किया गया। उक्त ऑन लाईन कार्यशाला में बिलासपुर रेंज के सभी जिलों से लगभग 200 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी सम्मिलित होकर प्रशिक्षण प्राप्त किये।
सफल प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षक डॉ. प्रियंका लकड़़ा एवं डॉ. स्वाति कुजूर वैज्ञानिक अधिकारी को राम गोपाल गर्ग पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज के द्वारा धन्यवाद ज्ञापित करते हुए स्मृति चिन्ह (मोमेंटो) देकर सम्मानित किया गया। निश्चित ही कार्यशाला से डीएनए एवं जैविक/भौतिक साक्ष्य संकलन एवं परीक्षण संबंधी कार्यो पर सुधार होगा। कार्यक्रम का संचालन श्री भोजराम पटेल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली के द्वारा किया गया।
डीएनए एवं जैविक/भौतिक साक्ष्य संकलन, परीक्षण कार्यशाला आयोजित



