जशपुरनगर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से निरंतर प्रयासों किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में ग्राम बस्तला एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में उभरा है। यह गांव दुलदुला विकासखण्ड में स्थित है और घने जंगलों एवं पहाडिय़ों से घिरा हुआ है। झारखंड सीमा के समीप स्थित यह ग्राम भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत दुर्गम रहा है, जिसके कारण यहां मूलभूत सुविधाओं का विकास लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण बना रहा।
योजना के क्रियान्वयन से पूर्व ग्राम बस्तला के निवासियों की पेयजल के लिए हैंडपंप, कुओं एवं प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता था। विशेषकर महिलाओं एवं बालिकाओं को प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर पानी लाना पड़ता था, जिसमें उनका काफी समय और श्रम व्यय होता था। कई बार उन्हें दिन में कई चक्कर लगाने पड़ते थे. जिससे अन्य घरेलू एवं आर्थिक कार्य प्रभावित होते थे। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती थी। जल स्त्रोतों का पानी मटमैला एवं दूषित हो जाता था, जिससे पीने योग्य पानी प्राप्त करना कठिन हो जाता था। स्वच्छता के किसी निर्धारित मानक के अभाव में ग्रामीणों को असुरक्षित जल का उपयोग कर पड़ता था, जिसके कारण जलजनित बीमारियां जैसे दस्त उल्टी एवं अन्य संक्रमण आम बात थे। इससे न केवल लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होता था, बल्कि आर्थिक रुप्प से भी अतिरिक्त बोझ पड़ता था। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्राम बस्तला में एक उच्च स्तरीय जलागार (ओवरहेड टेक) का निर्माण किया गया, जिसकी क्षमता 10 किलोलीटर है।
इसके साथ ही पूरे गांव में पाइपलाइन नेटवर्क बिछाकर घर-घर तक नल कनेक्शन प्रदान किए गए। वर्तमान में ग्राम के 39 परिवारों को फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन के माध्यम से नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के सफल संचालन के लिए ग्राम स्तर पर जल एवं स्वच्छता समिति का गठन किया गया है, जो योजना के रखरखाव एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रही है। स्थानीय स्तर पर पंप ऑपरेटरों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है. जिससे जल आपूर्ति प्रणाली का संचालन नियमित एवं सुचारु रूप से हो रहा है। सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पोजना के प्रति ग्रामवासियों में स्वामित्व की भावना विकसित हुई है. जो इसकी दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करती है।
वर्तमान में ग्राम बस्तला की स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अब प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। महिलाओं को अब पानी लाने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता. जिससे उनके समय और श्रम की बचत हुई है। यह समय अब वे अपने परिवार बच्चों की शिक्षा एवं अन्य आयवर्धक गतिविधियों में लगा रही है. जिससे उनका सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण हुआ है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता के कारण जलजनित बीमारियों में कमी आई है और ग्रामीणों का स्वास्थ्य स्तर बेहतर हुआ है। पहले जहां बीमार पडऩा सामान्य बात थी. वहीं अब लोग अधिक स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन जी रहे हैं। इस योजना का सकारात्मक प्रभाव बच्चों पर भी पड़ा है। अब उन्हें पानी लाने में समय व्यतीत नहीं करना पड़ता, जिससे उनकी विद्यालय में उपस्थिति बढ़ी है और शिक्षा के प्रति उनका रुझान भी बेहतर हुआ है। ग्राम के सभी निवासी इस परिवर्तन से अत्यंत प्रसन्न हैं ओर योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए शासन एवं संबंधित विभाग के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन ने उनके जीवन को सरल, सुरक्षित और सम्मानजनक बना दिया है। ग्राम बस्तला की यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीकी प्रबंधन एवं सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित की जाए, तो दूरस्थ एवं कठिन भोगोलिक परिस्थितियों में भी विकास की नई राहें खोली जा सकती हैं। यह गांव आज हर घर जल के लक्ष्य की दिशा में एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जो अन्य ग्रामों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
हर घर जल के लक्ष्य की दिशा में एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा ग्राम बस्तला
गांव के 39 परिवारों को कनेक्शन के माध्यम से नियमित रूप से उपलब्ध कराया जा रहा स्वच्छ पेयजल



