रायपुर। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड छत्तीसगढ़ की स्वीकृत नई गाइडलाइन दरों को लेकर आमजन में उत्पन्न भ्रम को दूर करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने विस्तृत जानकारी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई गाइडलाइन दरें अधिक सरल और वैज्ञानिक हैं। इनके माध्यम से वर्षों से चली आ रही विसंगतियों का समाधान भी किया गया है। सरकार ने बताया कि कुछ स्थानों पर यह गलत भ्रम फैलाया जा रहा है कि गाइडलाइन दरों में अत्यधिक वृद्धि की गई है या दस्तावेज पंजीयन की प्रक्रिया बाधित हो गई है। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि नई गाइडलाइन 20 नवंबर 2025 से प्रभावी हो चुकी है और इस अवधि में कांकेर जिले में लगभग 98 दस्तावेजों का पंजीयन सुचारू रूप से किया जा चुका है। जिले के सभी उप-पंजीयक कार्यालयों में पहले की तरह नियमित रूप से पंजीयन कार्य जारी है।
दर वृद्धि संबंधी भ्रांतियों का समाधान
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि गाइडलाइन दरों का अंतिम पुनरीक्षण वर्ष 2019-20 में हुआ था। छह वर्ष बाद किए जा रहे इस पुनरीक्षण में नगरीय क्षेत्रों में केवल 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो स्वाभाविक और तार्किक है। यदि दरों में हर वर्ष वृद्धि की जाती, तो वर्तमान दरें इससे कहीं अधिक होतीं। इसलिए अत्यधिक वृद्धि का दावा पूरी तरह निराधार है।
नगरीय क्षेत्रों में व्यापक सरलीकरण
पहले एक ही वार्ड में कई कंडिकाओं के कारण, समान भौगोलिक और व्यवसायिक स्थिति होने के बावजूद गाइडलाइन दरों में अंतर देखा जाता था। जिससे नागरिकों में असंतोष की स्थिति बनती थी। नवीन सर्वे, भौतिक सत्यापन और युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के बाद कंडिकाओं की संख्या कम कर दी गई है और दरों को समान किया गया है। कांकेर नगर पालिका के 21 वार्डों में पूर्व में 56 कंडिकाएं थीं, जिन्हें घटाकर 26 कर दिया गया है। इसी तरह नगर पंचायत चारामा, नरहरपुर, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ और पंखाजूर में कुल 253 कंडिकाओं को कम करके 105 किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे गाइडलाइन अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित हो गई है।
ई-पंजीयन प्रणाली पूरी तरह सुचारू
कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि नई गाइडलाइन ऑनलाइन अपडेट न होने के कारण दस्तावेज पंजीयन ठप हो गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि जिले के सभी उप-पंजीयक कार्यालयों में पंजीयन का कार्य बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से जारी है।
दर पुनरीक्षित न होने से होने वाली समस्याओं का उल्लेख
सरकार ने बताया कि पुरानी गाइडलाइन दरें जारी रहने से काले धन के लेनदेन को बढ़ावा मिलता है। कई बार वास्तविक सौदा मूल्य अधिक होने के बावजूद पंजीयन पुरानी दरों पर किया जाता है, जिससे अंतर की राशि काला धन बन जाती है और बाद में विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। पुरानी दरों के कारण संपत्तियों का मूल्यांकन भी कम होता है, जिससे खरीदारों की ऋण पात्रता प्रभावित होती है। मुआवजा निर्धारण में भी विसंगतियां सामने आती थीं। सरकारी अधिग्रहण की स्थिति में पुराने दरों के आधार पर मुआवजा तय होने से भूमि मालिकों, विशेषकर किसानों को उनकी संपत्ति का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। इसलिए नई गाइडलाइन दरें अधिक युक्तिसंगत और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप मानी जा रही हैं।
आमजन से अपील
राज्य शासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी भ्रम या अफवाह में न आएं। गाइडलाइन दरों से संबंधित किसी भी जानकारी या शंका के समाधान के लिए नागरिक अपने निकटस्थ पंजीयन कार्यालय में संपर्क कर तथ्यात्मक और प्रमाणिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नई गाइडलाइन दरों को प्रदेश में रियल एस्टेट लेनदेन को पारदर्शी बनाने, टैक्स चोरी रोकने और जमीन संबंधी मूल्यांकन को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की नई गाइडलाइन दरें लागू
कांकेर और प्रदेश में पारदर्शी प्रणाली से नागरिकों में भ्रम दूर



