रायगढ़। छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य से जुड़ी रचनाकार एवं शिक्षिका सुजाता दाश की स्वरचित कविता ‘हिंदी मेरे भीतर का पहला घर’ यूनाइटेड किंगडम से प्रकाशित प्रतिष्ठित हिंदी ई-पत्रिका ‘पुरवाई’* के हिंदी दिवस विशेषांक में प्रकाशित हुई है। यह उनके साहित्यिक सफर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सुजाता दाश हिंदी कविता, कहानी तथा जापानी छंद-विधाओं के लेखन के साथ शोध एवं आलोचनात्मक लेखन में भी सक्रिय हैं। उनकी बाल कविताएँ एवं कहानियाँ ‘किल्लोल’ बाल पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उनकी रचनाएँ विभिन्न समाचार-पत्रों और साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुई हैं। जापानी छंद विधाओं हाइकु एवं सेदोका के क्षेत्र में भी उनका निरंतर लेखन रहा है। उनकी हाइकु एवं अन्य छंद रचनाएँ ‘हाइकु शतदल’, ‘छत्तीसगढ़ हाइकु साधना’, ‘रायगढ़ हाइकु साधना’ तथा ‘हाइकु मंजूषा’’जैसी संपादित पुस्तकों एवं पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी हैं। शोध के क्षेत्र में भी सुजाता दाश की सक्रिय भागीदारी रही है। उनके शोध-पत्र ‘पदचिह्न’ पत्रिका सहित विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। इसके साथ ही ‘21वीं सदी में भारतीय साहित्य, सिनेमा और समाज का बदलता स्वरूप’* जैसी संपादित पुस्तक में भी उनके शोध-पत्र का प्रकाशन हुआ है। ‘पुरवाई’ में कविता के प्रकाशन पर सुजाता दाश ने पत्रिका के संपादक तेजेंद्र शर्मा के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस के विशेष अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित पत्रिका में अपनी स्वरचित कविता को स्थान मिलना उनके लिए अत्यंत हर्ष और प्रेरणा का विषय है। उनकी कविता ‘हिंदी मेरे भीतर का पहला घर’हिंदी भाषा के प्रति आत्मीयता, संवेदना और भावनात्मक जुड़ाव को अभिव्यक्त करती है। ‘पुरवाई’ के माध्यम से यह रचना व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँची है, जो सुजाता दाश की साहित्यिक एवं रचनात्मक यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।



