कुरमीभौना- जहां कभी शिक्षा को लेकर जागरूकता कम थी, उस छोटे से गांव कुरमीभौना की एक बेटी ने आज शिक्षा की नई रोशनी जगा दी है। यह कहानी है रुकमणी बेहरा की, जिन्होंने अपनी शारीरिक कमी को कमजोरी नहीं बल्कि हौसले की ताकत बनाकर गांव में शिक्षा की नई शुरुआत की।
कुरमीभौना में लंबे समय तक बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था। संसाधनों की कमी और जागरूकता के अभाव के कारण गांव के कई बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रह जाते थे। ऐसे माहौल में पली-बढ़ी रुकमणी ने इन परिस्थितियों को बहुत करीब से देखा और समझा। बचपन से ही उन्होंने महसूस किया कि शिक्षा ही वह रास्ता है जो समाज को बदल सकता है।
रुकमणी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव से ही प्राप्त की और आगे की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक सरकारी विद्यालय में लगभग छह वर्षों तक सेवा दी। इस दौरान आर्थिक और सामाजिक चुनौतियाँ भी सामने आईं, लेकिन विद्यालय के एक शिक्षक के सहयोग और मार्गदर्शन ने उन्हें आगे बढऩे का साहस दिया।
शारीरिक कमी होने के बावजूद रुकमणी ने कभी उसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने इसे अपनी प्रेरणा बना लिया। उनका मानना है कि मजबूत इरादे और सकारात्मक सोच के साथ हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।
गांव के बच्चों, विशेषकर बच्चियों की शिक्षा को लेकर वे हमेशा चिंतित रहीं। वे चाहती थीं कि गांव के बच्चों को भी बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने गांव में “ग्रामोदय स्कूल” की स्थापना की।
शुरुआत में संसाधनों की कमी, सीमित साधन और कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन रुकमणी ने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे गांव के लोगों का विश्वास बढ़ता गया और अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने लगे।
रुकमणी का कहना है—
मैंने जो भी सीखा है, उसे अपने गांव के बच्चों को देना चाहती हूँ। शिक्षा ही वह शक्ति है जो जीवन बदल सकती है। आज ग्रामोदय स्कूल केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि गांव के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनता जा रहा है। यहां पढऩे वाले बच्चे शिक्षा के साथ आत्मविश्वास, अनुशासन और बड़े सपने देखना भी सीख रहे हैं।
रुकमणी बेहरा की कहानी यह संदेश देती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो एक व्यक्ति पूरे गांव की दिशा और दशा बदल सकता है।
कविता शर्मा
घरघोड़ा
संघर्ष से सफलता तक: कुरमीभौना की बेटी ने जलाई शिक्षा की मशाल
शारीरिक कमी को हौसले में बदलकर रुकमणी बेहरा ने शुरू किया ‘ग्रामोदय स्कूल’



