खरसिया। कैलाश शर्मा। श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन आचार्य श्री मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने स्यमन्तक मणि और सुदामा चरित्र के प्रसंगों की संगीतमय व्याख्या की। कथा के प्रमुख प्रसंग और संदेश- स्यमन्तक मणि कथा आचार्य जी ने कहा कि सत्य को छिपाया जा सकता है, पर मिटाया नहीं जा सकता। सत्य के मार्ग पर चलने वाला परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। भगवान श्रीकृष्ण पर भी मणि चोरी का कलंक लगा, जिसे उन्होंने खुद को निर्दोष साबित कर ‘सत्यमेव जयते को चरितार्थ किया। प्रमुख प्रसंग – कथा में भौमासुर वध, 16,100 कन्याओं का उद्धार, ऊषा-अनिरुद्ध विवाह, बलराम जी द्वारा द्विविध वानर वध और भीम-जरासंध युद्ध का जीवंत वर्णन हुआ।
सुदामा चरित्र की सीख
निर्धनता और दरिद्रता में अंतर होता है सुदामा निर्धन थे, दरिद्र नहीं। भगवान धन-संपदा नहीं, केवल निश्छल भक्ति देखते हैं। सुदामा ने बिना कुछ मांगे अपना सर्वस्व (पोहा) अर्पण किया और भगवान ने उनकी हर आवश्यकता पूरी की। ?विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति – कथा श्रवण करने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल और डॉ. रामप्रताप सिंह (अध्यक्ष, छ.ग. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कल्याण मंडल) पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण व आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया। कथा के दौरान राधे-राधे के जयघोष से पंडाल गूंज उठा। लड्डू होली और फूल होली उत्सव के सुंदर भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए।
खरसिया में भागवत कथा का समापन स्यमन्तक मणि प्रसंग और सुदामा चरित्र पर झूमे श्रद्धालु
श्रीमती कौशल्या साय जी, बृजमोहन अग्रवाल, डॉ. रामप्रताप सिंह ने कथा श्रवण कर आचार्य श्री का लिया आशीर्वाद



