खरसिया। कैलाश शर्मा। श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा के तीसरे दिन पूज्य आचार्य श्री मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी ने व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रार्थना आत्मा और परमात्मा का सीधा संवाद है, जिसे ईश्वर तक पहुँचने के लिए किसी बिचौलिये या पोस्टमैन की आवश्यकता नहीं होती। कथा के मुख्य बिंदु प्रार्थना की शक्ति संसार की हर वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने के लिए साधन चाहिए, लेकिन सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना बिना किसी देरी के तत्क्षण प्रभु के चरणों में स्वीकार हो जाती है।
कपिल-देवहूति संवाद जब माता देवहूति ने संसार-बंधन से मुक्ति के लिए भगवान कपिल से प्रार्थना की, तो प्रभु ने उन्हें ऐसा ज्ञान दिया जिससे वे सिद्धिरा नदी के रूप में परिणत होकर मोक्ष को प्राप्त हुईं। सती चरित्र व ध्रुव चरित्र कथा व्यास ने सती चरित्र का सजीव वर्णन कर प्रांगण को शिवमय बना दिया। वहीं मात्र 5 वर्ष की आयु में ध्रुव जी की कठिन तपस्या और प्रभु दर्शन से ध्रुव लोक की प्राप्ति का प्रसंग सुनाकर भक्ति का महत्व समझाया। जीवन दर्शन आचार्य श्री ने कुसंगति त्यागकर अकेले रहने, सत्संग, सेवा और सुमिरन में लीन रहकर एक सच्चा मानव बनने की प्रेरणा दी। आज कथा के चौथे दिन प्रांगण में विशेष महोत्सव के रूप में श्री कृष्ण जन्मोत्सव (नंदोत्सव) अत्यंत धूमधाम से मनाया जाएगा। सभी धर्मप्रेमी बंधु सपरिवार इस पावन अवसर पर सादर आमंत्रित हैं।
भागवत कथा में बही भक्ति की धारा हृदय से की गई प्रार्थना बिना पोस्टमैन के पहुंचती है परमात्मा तक – आचार्य मृदुल कृष्ण
भागवत कथा में बही भक्ति की धारा हृदय से की गई प्रार्थना बिना पोस्टमैन के पहुंचती है परमात्मा तक - आचार्य मृदुल कृष्ण



