रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लॉक में तेतला से पुसौर के बीच करीब 7 किलोमीटर लंबी सडक़ लंबे समय से बदहाल है। सडक़ पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण ग्रामीणों को रोजाना आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के बाद गड्ढों में पानी और कीचड़ भर जाने से स्थिति और खराब हो गई है। इस मार्ग से करीब 15 गांवों के लोग रोजाना पुसौर आना-जाना करते हैं, ऐसे में सडक़ की जर्जर स्थिति का सीधा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई और रोजगार से जुड़े आवागमन पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 5-6 साल से सडक़ की स्थिति लगातार खराब है, लेकिन अब तक स्थायी सुधार नहीं हुआ। सडक़ निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर ष्टस्क्र फंड से राशि उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है।
तेतला से पुसौर को जोडऩे वाली सडक़ की लंबाई करीब 7 किलोमीटर बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, इस पूरे मार्ग पर कई स्थानों पर बड़े गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के दिनों में इन गड्ढों में पानी भर जाने से सडक़ और उसके गड्ढों के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। वाहन चालकों को पानी और कीचड़ से भरे गड्ढों से बचकर निकलना पड़ता है। कई जगह सडक़ की सतह इतनी खराब है कि दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार खराब सडक़ के कारण रोजाना आने-जाने वाले लोगों को अतिरिक्त समय और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रायगढ़ जिले में सडक़ निर्माण और मरम्मत को लेकर हाल के महीनों में कई परियोजनाओं पर काम शुरू होने की जानकारी सामने आई है। जून 2026 में कोड़ातराई-पुसौर-सूरजगढ़ मार्ग के लिए 19.70 करोड़ रुपए की लागत वाले निर्माण कार्य का शिलान्यास भी किया गया था। हालांकि, ग्रामीणों की मांग तेतला-पुसौर मार्ग की मौजूदा जर्जर स्थिति को लेकर है और वे इस सडक़ के लिए भी ठोस समाधान चाहते हैं।
इस सडक़ का उपयोग केवल तेतला और पुसौर के बीच रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, कंसरा, बादीमाल, पुसौदा, खपिता, जतराई, सेमीभौवर, कोटमार समेत करीब 15 गांवों के लोग इस मार्ग से पुसौर पहुंचते हैं। पुसौर पहुंचना इन ग्रामीणों के लिए बाजार, सरकारी कार्यालय, बैंक, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सडक़ की खराब स्थिति का असर सीधे ग्रामीण जीवन पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में समस्या और बढ़ जाती है। सडक़ पर पानी जमा होने के कारण वाहन चलाना मुश्किल होता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए गड्ढों से निकलना खास तौर पर चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सडक़ की बदहाल स्थिति का असर स्कूली बच्चों पर भी पड़ रहा है। नवागढ़, कर्राजोर और आसपास के क्षेत्रों से विद्यार्थी पढ़ाई के लिए तेतला हाई स्कूल की ओर आते-जाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के दिनों में सडक़ पर पानी और कीचड़ जमा होने के कारण बच्चों को आने-जाने में परेशानी होती है। दोपहिया वाहनों और अन्य साधनों से स्कूल पहुंचने वाले विद्यार्थियों को खराब सडक़ के कारण अतिरिक्त जोखिम उठाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सडक़ का निर्माण या स्थायी मरम्मत होने से विद्यार्थियों के साथ-साथ रोजाना काम के लिए आने-जाने वाले लोगों को भी राहत मिलेगी।
सडक़ की स्थिति को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब विरोध के रूप में सामने आने लगा है। कुछ दिन पहले एक ग्रामीण ने सडक़ के गड्ढे में धान का रोपा लगाकर विरोध दर्ज कराया। प्रतीकात्मक रूप से किए गए इस विरोध के जरिए ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान सडक़ की स्थिति की ओर आकर्षित करने की कोशिश की। ग्रामीणों का कहना है कि सडक़ की हालत ऐसी हो गई है कि गड्ढों में पानी और कीचड़ जमा होने पर यह मार्ग सडक़ से ज्यादा खेत जैसा नजर आने लगता है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब कई वर्षों से सडक़ खराब है तो स्थायी मरम्मत के लिए अब तक प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाया गया। गांव की सरपंच पार्वती गुप्ता के मुताबिक सडक़ पिछले करीब 5-6 वर्षों से खराब है। सडक़ निर्माण के लिए कंपनी के ष्टस्क्र मद से राशि उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियों से जुड़ी कंपनियों के ष्टस्क्र संसाधनों का इस्तेमाल बुनियादी सुविधाओं के विकास में किया जा सकता है। इसी आधार पर सडक़ निर्माण के लिए ष्टस्क्र फंड से सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई है। ग्रामीणों के अनुसार, इस संबंध में खरसिया विधायक और पुसौर जनपद के अधिकारियों को भी सडक़ की स्थिति से अवगत कराया गया है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित स्तर पर पहल कर सडक़ की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
तेतला-पुसौर सडक़ बनी मुसीबत, गड्ढों में फंसी 15 गांवों की आवाजाही



