रायगढ़। विकासखंड लैलूंगा के ग्राम पंचायत आमपाली के आश्रित ग्राम राजाआमा स्थित प्राथमिक शाला की बदहाल व्यवस्था ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां पहली से पांचवीं कक्षा तक के कुल 32 छात्र-छात्राएं एक ही कमरे में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल भवन अत्यधिक जर्जर होने के कारण बच्चों की कक्षाएं पृथक्करण (शेड) में संचालित की जा रही हैं, जिसे ग्रामीण ‘कचरा शेड’ जैसी स्थिति वाला बता रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि बच्चों को मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) करने के लिए करीब आधा किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। छोटे-छोटे बच्चों को प्रतिदिन इतनी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनकी सुरक्षा और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही हैं। विद्यालय के सहायक शिक्षक बुद्धदेव बेहरा ने बताया कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। उनका कहना है कि बच्चों को जर्जर भवन के कारण शेड में बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है और भोजन के लिए दूर ले जाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी उच्च अधिकारियों को इसकी शिकायत की गई थी। अधिकारी मौके पर पहुंचे, निरीक्षण भी किया, लेकिन आज तक न तो नया भवन बना और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से तत्काल नए स्कूल भवन के निर्माण तथा बच्चों के लिए सुरक्षित एवं बेहतर शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारी स्वयं स्थिति देखकर लौट चुके हैं, तो आखिर कार्रवाई कब होगी? क्या किसी हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी, या फिर राजाआमा के मासूमों को जल्द सुरक्षित स्कूल की सौगात मिलेगी?
कचरे के शेड में भविष्य गढऩे को मजबूर देश के नवनिहाल
जर्जर स्कूल पर प्रशासन बेखबर, एक कमरे में ठूंसे गए 32 बच्चे, मिड-डे मील के लिए आधा किलोमीटर चलते हैं पैदल



