धरमजयगढ़। जिले में भारतमाला सडक़ परियोजना के अंतर्गत धरमजयगढ़ क्षेत्र के सिसरिंगा घाट में सडक़ निर्माण को लेकर उठे गंभीर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। प्रारंभिक जांच के बाद दोबारा कराई गई विभागीय जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आने की चर्चा है, जिनसे परियोजना के क्रियान्वयन और एलाइनमेंट में हुए कथित बदलाव पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, पहले चरण की जांच में निर्माण एजेंसी दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड को राहत मिली थी। इसके बाद राइट ऑफ वे की वास्तविक स्थिति से जुड़े डिजिटल फोटो, तकनीकी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य संबंधित अधिकारियों तक पहुंचे। इन्हीं तथ्यों के आधार पर धरमजयगढ़ वनमंडलाधिकारी द्वारा प्रकरण की पुन: जांच कराई गई। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि दूसरी जांच के दौरान यह पाया गया कि सडक़ निर्माण के दौरान प्रभावित प्राचीन मंदिर परिसर की संरचनाओं को क्षति पहुंची। जांच अधिकारी ने कथित तौर पर यह भी बताया कि निर्माण एजेंसी मंदिर परिसर में क्षतिग्रस्त संपत्तियों के पुनर्निर्माण के लिए सहमत हुई है।
जांच के दौरान वन अधिकार पट्टा भूमि के उपयोग का मुद्दा भी सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर के पुजारी को आवंटित वन अधिकार पट्टा भूमि का परियोजना कार्य में उपयोग किए जाने के संबंध में कंपनी और पट्टाधारी के बीच एक समझौता हुआ था। बताया जा रहा है है कि इसके एवज में लगभग पांच लाख रुपये का भुगतान किया गया।
मामले का तकनीकी पक्ष भी चर्चा में है। ड्रोन सर्वे के आधार पर यह तथ्य सामने आ रहा है कि प्रस्तावित मार्ग के समीप स्थित उच्च दाब विद्युत टावर को स्थानांतरित करने से बचने के लिए सडक़ के एलाइनमेंट में बदलाव किया गया। आरोप है कि इसी परिवर्तन के कारण मंदिर परिसर और आसपास की वन संपदा प्रभावित हुई। यदि जांच में यह तथ्य प्रमाणित होते हैं, तो परियोजना के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
इस संबंध में जब धरमजयगढ़ वनमंडलाधिकारी जितेन्द्र कुमार उपाध्याय से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, उनकी ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। धरमजयगढ़ डी एफ ओ का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब स्थानीय ग्रामीणों, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों और प्रशासनिक हलकों की नजर इस बात पर है कि पुन: जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभाग निर्माण एजेंसी और अन्य जिम्मेदार पक्षों के विरुद्ध क्या कार्रवाई करता है। यह पूरा मामला भारतमाला परियोजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, वन संरक्षण और सार्वजनिक जवाबदेही की कसौटी बनता जा रहा है।
ऋषभ तिवारी
भारतमाला प्रोजेक्ट के ड्रोन सर्वे वीडियो में एलाइनमेंट विवाद की परतें खुलीं!
दूसरी जांच रिपोर्ट में कई चौकाने वाले तथ्य उजागर



