जशपुरनगर। वीएसके ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर शिक्षकों का वेतन आहरित करने तथा कम उपस्थिति पर वेतन कटौती संबंधी डीपीआई के निर्देश का छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि जब तक ऐप की तकनीकी खामियां दूर नहीं होतीं और विद्यालयों के उपस्थिति पंजी का भौतिक सत्यापन नहीं किया जाता तब तक किसी भी शिक्षक का वेतन रोकना या काटना पूरी तरह अनुचित है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि प्रदेशभर में वीएसके ऐप में लोकेशन, नेटवर्क और समय पर उपस्थिति दर्ज न होने जैसी गंभीर तकनीकी समस्याएं बनी हुई हैं। कई शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचने के बावजूद ऐप में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में केवल ऐप के आधार पर वेतन कटौती का आदेश न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब विद्यालयों में शिक्षक उपस्थिति पंजी में ऑफलाइन उपस्थिति का कोई महत्व नहीं रह गया है? जब प्रत्येक शिक्षक प्रतिदिन उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कर रहा है, तो उसके सत्यापन के बिना केवल ऐप के आधार पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। एसोसिएशन ने बताया कि अधिकांश शिक्षकों ने निजी डेटा सुरक्षा संबंधी आशंकाओं के बावजूद अपने निजी मोबाइल में वीएसके ऐप इंस्टॉल किया है। संगठन का स्पष्ट मत है कि यदि ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू करनी ही है तो पूरे प्रदेश में बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने की समान व्यवस्था लागू की जाए। जशपुर जिला इकाई के प्रांतीय पदाधिकारी अनिल रावत, एल.डी. बंजारा, जयेश सौरव टोपनो एवं जिलाध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव ने शासन से मांग की है कि वे बायोमेट्रिक उपस्थिति के विरोधी नहीं हैं, लेकिन तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण ऐप के आधार पर वेतन कटौती का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। विद्यालयों के उपस्थिति पंजी का भौतिक सत्यापन कराया जाए और पूरे प्रदेश में बायोमेट्रिक मशीन से उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था लागू की जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि वीएसके ऐप की तकनीकी खामियां दूर किए बिना वेतन कटौती का आदेश वापस नहीं लिया गया तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।



