रायगढ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का मूल उद्देश्य शिक्षा को व्यवहारिक, कौशल आधारित और विद्यार्थी केंद्रित बनाना है। इसी सोच के तहत उच्च शिक्षा में प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) और आंतरिक मूल्यांकन को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। लेकिन रायगढ़ स्थित नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय द्वारा सेमेस्टर मुख्य परीक्षा का टाइम टेबल जारी किए जाने के बाद पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है।
स्थिति यह है कि विश्वविद्यालय से संबद्ध अधिकांश कॉलेजों में अब तक इंटरनल और प्रायोगिक परीक्षाएं आयोजित ही नहीं हुई हैं, जबकि नियमत: पहले प्रैक्टिकल परीक्षा और उसके बाद मुख्य लिखित परीक्षा होनी चाहिए। इसके बावजूद सीधे थ्योरी परीक्षा का टाइम टेबल जारी कर देना शिक्षा नीति की मूल भावना के विपरीत माना जा रहा है। विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच इस निर्णय को लेकर असमंजस और नाराजगी दोनों देखी जा रही है। छात्रों का कहना है कि प्रैक्टिकल परीक्षाएं केवल औपचारिकता नहीं होतीं, बल्कि विषय की वास्तविक समझ और प्रयोगात्मक ज्ञान का आधार होती हैं। ऐसे में बिना प्रायोगिक मूल्यांकन के सीधे मुख्य परीक्षा लेना छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव डालने जैसा है।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अनुभव आधारित शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। यदि विश्वविद्यालय स्वयं ही निर्धारित शैक्षणिक प्रक्रिया का पालन नहीं करेगा तो कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता और नीति की विश्वसनीयता दोनों प्रभावित होंगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन ने टाइम टेबल जारी करने से पहले कॉलेजों में प्रैक्टिकल परीक्षाओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की थी? यदि नहीं, तो यह शैक्षणिक समन्वय की गंभीर कमी को दर्शाता है। और यदि जानकारी होने के बावजूद ऐसा किया गया, तो यह छात्रों के हितों की अनदेखी मानी जाएगी।
अब आवश्यकता इस बात की है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन स्थिति स्पष्ट करे कि प्रायोगिक परीक्षाएं कब और कैसे आयोजित होंगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल दस्तावेजों और भाषणों तक सीमित न रहे, बल्कि उसकी भावना जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे।
क्या कहते हैं कुलसचिव
यह अनुमानित ( टेंटिटिव) समय सारणी है। महाविद्यालयों में सेमेस्टर परीक्षाएं अगले माह 1 जून से आरंभ होंगी। यह समय सारणी विद्यार्थियों की सुविधा और सतर्कता के लिए जारी होती है। जहां तक प्रायोगिक परीक्षा की बात है तो प्रैक्टिकल परीक्षा महाविद्यालयों में आरंभ हो चुकी है।
तरुणधर दीवान
कीलसचिव, नंदकुमार पटेल यूनिवर्सिटी
इंटरनल और प्रैक्टिकल बिना थ्योरी परीक्षा?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना पर सवालों के घेरे में नंदकुमार पटेल यूनिवर्सिटी



