रायगढ़। जिले में रविवार की दोपहर माजदा वाहन की ठोकर से घायल मजदूरो को लेकर पिकअप चालक अस्पताल पहुंचा और उन्हें छोडक़र चला गया। तकरीबन एक घंटे तक बगैर इलाज के दर्द से तड़पते मजदूरों को स्थानीय युवाओं की मदद से अस्पताल में भर्ती कराया गया तब जाकर उनका इलाज शुरू हो सका।
मिली जानकारी के अनुसार सोमवार की दोपहर सुबह पूंजीपथरा क्षेत्र में स्थित सिवाना स्टील प्लांट में काम करने वाले तीन युवक कैलाश, विकास और एक अन्य युवक बीपी सुगर का इलाज कराने रायगढ़ के एक निजी अस्पताल पहुंचे थे। जहां से तीनों बाईक में सवार होकर वापस लौट रहे थे। बाईक सवार तीनों युवक जब दोपहर 12 बजे के आसपास लाखा के पास पहुंचे ही थे की सामने की तरफ से आ रहे टायर लोड माजदा वाहन के चालक ने तेज एवं लापरवाही पूर्वक वाहन चलाते हुए उन्हें जोरदार ठोकर मार दिया। इस घटना के बाद आरोपी चालक वाहन को मौके पर छोडक़र जंगल की तरफ भाग गया। घायल युवक के साथी ने बताया कि इस दुर्घटना के बाद आसपास के लोगों ने डायल 112 की टीम को फोन करके घटना से अवगत कराया गया, परंतु काफी देर बीत जाने के बावजूद 112 वाहन के नही पहुंचने पर घायलों को रास्ते से गुजर रहे एक पिकअप वाहन से रायगढ़ जिला अस्पताल भेजा गया। लेकिन पिकअप चालक उन्हें अस्पताल में भर्ती कराये बिना ही छोडक़र चला गया। इस स्थिति में घायल तकरीबन एक घंटे तक पेड़ से नीचे बगैर उपचार के तड़पते रहे। घायल युवक विकास दास ने बताया कि माजदा वाहन की ठोकर से उसके सिर में चोट आई है और कैलाश का पैर टूट गया है और तीसरे युवक को हल्की खरोच आई है। घायल युवक काफी देर तक दर्द से कराहते हुए तड़पते रहे इसी बीच कुछ युवाओं की नजर उन पर पड़ी और उन्हीं के द्वारा दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया तब जाकर उनका इलाज शुरू हो सका।
जागरूकता अभियान का नहीं असर
सडक़ सुरक्षा माह के दौरान यातायात पुलिस कई तरह के जागरूकता अभियान चला रही है, ताकि सडक़ दुर्घटनाओं को रोका जा सके और घायलों को समय पर इलाज मिल सके। इसके बावजूद आज की हुई घटना को देखते हुए लगता नही है कि यातायात अमला लोगों को जागरूक करने में कहीं न कहीं विफल साबित हो रही है। चूंकि पिछले दिनों सृजन कक्ष में राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा माह के दौरान बताया गया था कि सडक़ दुर्घटनाओं में हो रही मौतों को रोकने और घायलों को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा राहवीर योजना संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत जो भी व्यक्ति दुर्घटनास्थल से गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को एक घंटे के भीतर अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर पहुंचाता है, उसे 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि एवं प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया जाता है।



