रायगढ़। मीनकेतन प्रधान पूर्व प्राध्यापक हिन्दी किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रायगढ़ का आलेख हिन्दी व छत्तीसगढ़ी मातृभाषाई एकात्मकता का प्रकाशन हालैंड की अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित हुई है। ‘साहित्य का विश्व रंग’ के ‘भारतीय भाषाओं की एकात्मकता विशेषांक’ (जुलाई-दिसंबर 2025,संयुक्तांक -बारह,तेरह ) में हुआ है। इसके सम्पादक नीदरलैंड के प्रतिष्ठित प्रवासी साहित्यकार डॉ.रामा तक्षक हैं। मीनकेतन प्रधान ने वैश्विक स्तर पर ‘हिन्दी व छत्तीसगढ़ी मातृभाषाई एकात्मकता’ विषयक आलेख में छत्तीसगढ़ की मातृभाषा ‘छत्तीसगढ़ी’ के महत्त्व एवं वैशिष्ट्य का विद्वतापूर्ण प्रतिपादन किया है (पेज नंबर- 72 से 78 )। भारत सहित विश्व के अन्य देशों के 35 विद्वानों में छत्तीसगढ़ से मीनकेतन प्रधान उक्त विशेषांक में समादृत (एक मात्र ) हैं।
जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा एवं साहित्य के विद्वान हीरालाल काव्योपाध्याय,भाल चंद्र राव तैलंग, बलदाऊ प्रसाद निर्मलकर, दयाशंकर शुक्ल, डॉ.नरेंद्र देव वर्मा, डॉ.कांतिकुमार जैन, डॉ.रमेशचन्द्र मेहरोत्रा, डॉ.विनय कुमार पाठक, डॉ.चित्तरंजन कर, डॉ. शंकर शेष, डॉ.सत्यभामा आडिल, डॉ.विनोद कुमार वर्मा, डॉ.बिहारी लाल साहू, डॉ.शकुन्तला वर्मा आदि के विचारों का समन्वय करते हुए उनके प्रदेय का भी उल्लेख किया है।
हालैंड से प्रकाशित उक्त पत्रिका ‘साहित्य का विश्व रंग’ के मार्गदर्शक डॉ.संतोष चौबे-कुलाधिपति महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय भोपाल तथा प्रसिद्ध साहित्यकार लीलाधर मंडलोई हैं। सम्पादक डॉ. रामा तक्षक (नीदरलैंड) तथा सहायक सम्पादक द्वय विनीता तिवारी,शिवानी शुक्ला सहित प्रबंधन के सभी सदस्यों का हिन्दी भाषा साहित्य के वैश्विक विकास -विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है।
उक्त विशेषांक में सम्पादक डॉ. रामा तक्षक (नीदरलैंड्स) तथा विद्वान लेखक गण – पद्मश्री डा. तोमिओ मिज़ोकामि,अतुल कोठारी, डॉ. दामोदर खड़से, डॉ .हरिसिंह पाल, डॉ. जयन्ती प्रसाद नौटियाल, डॉ . शिबन कृष्ण रैणा, डॉ. शोभा ओम प्रजापति, डॉ. श्वेता दीप्ति, उल्फत मुखीबोवा (उज़्बेकिस्तान), कौसर भुट्टो, तत्याना ओरांस्कया (जर्मनी), निधि खरे (नीदरलैंड्स ), श्रद्धा रामा-मतई (नीदरलैंड्स), प्रो. दीपेंद्र सिंह जाडेजा, श्रीपर्णा तरफदार, मीनकेतन प्रधान, डॉ. एस. ए. मंजुनाथ, शशि पाधा (वर्जीनिया), डॉ. अइनापुरपु रामलिंगेश्वर राव,मनोहर सिंह चौहान मधुकर,रजनी प्रभा, विद्यावाचस्पति अजय कुमार झा (नेपाल), एस भाग्यम शर्मा, डॉ. एन. लावण्या, डॉ. के. वत्सला,डॉ. राकेश पांडेय,डॉ. राम गोपाल सिंह, सरोजिनी नौटियाल, डॉ. विनोद कुमार,बद्र वास्ती,सोमा बंद्योपाध्याय, बरखा ख़ुशहालानी (मुंबई), सागर देसले,डॉ. ममता जैन(पुणे) के आलेख समाहित हैं।
उल्लेखनीय है कि इस पत्रिका में पूर्व से मीनकेतन प्रधान के लेख प्रकाशित होते रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, कैनेडा आदि देशों से प्रकाशित पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं।
उक्त आलेख के प्रकाशन- संदर्भ में प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.विनोद कुमार वर्मा ने कहा है कि ‘हिन्दी व छत्तीसगढ़ी मातृभाषाई एकात्मकता ‘ आलेख भाषाई ज्ञान से आप्लावित है। इसे आद्यन्त पढऩे के बाद यह कह सकता हूँ कि यह आलेख छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रति डॉ.प्रधान के प्रेम व अनुराग को प्रतिध्वनित कर रहा है। सारगर्भित, पठनीय व शोधपरक आलेख के लिए डॉ.मीनकेतन प्रधान को बधाई। इस क्रम में चर्चित रचनाकार अंजनी कुमार तिवारी सुधाकर ने अपने संदेश में लिखा है- यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि हिंदी व छत्तीसगढ़ी भाषा की समन्वित पृष्ठभूमि के साथ विश्व पटल पर विश्व भाषा संस्कृत की सहोदरी रुप में अन्य भारतीय भाषाओं से वैश्विक भाषा प्रेमी अवगत हुए हैं जिसके लिए डॉ .मीन केतन प्रधान जी का श्रमसाध्य विज्ञ प्रयास प्रशंसनीय है। लिंगम चिरंजीव राव का विचार है- यह लेख पढक़र छत्तीसगढ़ी और हिंदी की समरसता से संबंधित बातों से परिचित हुआ। इसी तरह डॉ. ज्ञानेश्वरी सिंह ने इस आलेख को हिन्दी और छत्तीसगढ़ी के साहित्यिक विकास की जानकारी के लिए महत्वपूर्ण माना है।
इस कड़ी में डॉ.विनय कुमार पाठक, डॉ.राघवेन्द्र दुबे, रमेश चंद्र श्रीवास्तव, डॉ.राजेश दुबे, डॉ. सीमा प्रधान, डॉ.बेठियार सिंह साहू, सौरभ सराफ, पंकज रथ शर्मा, अमित सदावर्ती, लोचन गुप्ता, हरिशंकर गौराहा, वसंत पंडा, बनवारी लाल देवांगन,जगदीश यादव एवं अन्य साहित्यकारों ने बधाई दी है।
मीनकेतन प्रधान का आलेख हालैंड की अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित



