रायगढ़। धरमजयगढ़ वन मंडल के बोरो वन परिक्षेत्र खम्हार उत्तर बीट के लोटान गांव के जंगल में बुधवार की शाम मवेशी चरा कर लौट रहे अधेड़ ग्रामीण को हाथी ने कुचल कर मार डाला है। इस घटना से जहां क्षेत्र में भय में भय का माहौल बन गया है तो वहीं वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम लोटान निवासी लोकनाथ यादव (55 वर्ष) पिता फिरूराम यादव बुधवार को सुबह रोज की तरह मवेशी चराने के लिए खम्हार के जंगल में लोटान-बकालो के कक्ष क्रमांक 662 आरएफ में गया हुआ था। जहां से लौटते समय अंधरा होने के कारण अचानक उसका सामना एक हाथी से हो गया, वहीं जब ग्रामीण ने हाथी को देखा तो भागने का प्रयास किया लेकिन हाथी ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया और पैरों तले कुचल दिया, इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। देर रात तक जब ग्रामीण घर नहीं पहुंचा तो परिजन उसकी खोजबीन शुरू करते हुए घटना की सूचना तत्काल वन विभाग को दिया, इससे वन अमला ने शव का पंचनामा कर आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा।
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि इन दिनों हाथियों की संख्या काफी बढ़ गई है। जिससे हाथी कभी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो कभी मकान को ध्वस्त कर दे रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी हाथियों की सही जानकारी उपलब्ध नहीं हो पा रही है इससे रात होते ही घरों में दुबकने को मजबूर हो रहे हैं।
कराई जा रही मुनादी
इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो हाथी मित्रदल द्वारा लगातार हाथियों पर नजर रखा जा रहा है, इससे जिन क्षेत्र में हाथी जाते हैैं उस क्षेत्र के ग्रामीणों को मुनादी कर जानकारी दी जा रही है, ताकि जंगल की ओर न जाए। हालांकि इन दिनों हाथी अलग- अलग दल में भ्रमण कर रहे हैे, जिसमें कई जगह अकेला हाथी घुम रहे हैं, जो रात होते ही कभी खेतों की तरफ तो कभी बस्ती में पहुंच जाते हैं। इससे संबंधित क्षेत्र के लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। साथ ही अगर हाथी दिखे तो उससे दूरी बनाते हुए इसकी सूचना वन विभाग को तत्काल दें, ताकि समय रहते उसे जंगल की ओर भगाया जा सके।
परिजनों को दी गई तात्कालिक सहायता
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में एक सिंगल हाथी की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद लोटान और आसपास के गांवों में पहले ही मुनादी कराई गई थी, ताकि लोग अकेले जंगल की ओर न जाएं। घटना के बाद मृतक के परिजनों को वन विभाग की ओर से 25 हजार रुपए की तात्कालिक सहायता राशि प्रदान की गई है। साथ ही आगे मिलने वाली मुआवजा राशि की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।
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