हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध समकालीन कवि -कथाकार , ज्ञान पीठ एवं अन्य अनेक सम्मानों से सम्मानित कीर्तिशेष विनोद कुमार शुक्ल (जन्म 1 जनवरी, 1937 )के निधन (23 दिसंबर 2025) पर विश्व हिन्दी अधिष्ठान (न्यास ) रायगढ़ के संस्थापक डॉ.मीनकेतन प्रधान ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी रचनाधर्मिता में जनसंवेदना और मानवीय मूल्यों का गहरा प्रभाव रहा है। जिसके कारण उनकी कृतियाँ , उपन्यास -‘नौकर की क़मीज़ ‘ , ‘दीवार में एक खिडक़ी रहती थी ‘ खिलेगा तो देखेंगे’, ‘हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़’, कहानी संग्रह-‘पेड़ पर कमरा’, कविता संग्रह-‘लगभग जयहिन्द’, ‘वह आदमी नया गरम कोट पहनकर चला गया विचार की तरह’, ‘सब कुछ होना बचा रहेगा’आदि कालजयी श्रेणी में परिगणित हैं ।
विनोद कुमार शुक्ल के निधन को डॉ. विनय कुमार पाठक-पूर्व अध्यक्ष राजभाषा आयोग छत्तीसगढ़ , डॉ. विनोद कुमार वर्मा ने हिन्दी जगत् की अपूरणीय क्षति बताया। अंजनी कुमार तिवारी सुधाकर,डॉ. ज्ञानेश्वरी सिंह, रेनू सामल, सुरेन्द्र बंसल,पुष्पांजलि दासे,लिंगम चिरंजीव राव,प्रोफेसर मुन्ना लाल गुप्ता, डॉ.अर्चना पांडेय, डॉ.गजेन्द्र तिवारी,रमेश चन्द्र श्रीवास्तव ,सोनल मावतवाल श्रीवास ,अमित सदावर्ती,डॉ.रश्मि शुक्ला,प्रमिला पटेल,डॉ.बेठियार सिंह साहू, डॉ.अनिल सक्सेना,नरेंद्र पटेल, पूनम पाठक, डॉ. सुनीता राठौर,प्रीतम ,पूर्णचन्द्र बेहरा,डॉ.गौकरण जायसवाल, काव्यांशी मिश्रा, डॉ.रंजना मिश्रा, निर्भय राम गुप्ता, हेमराज, ममता सिंह, रविदत्त शर्मा, डॉ.योगिता वाजपेई,अनिल कुमार पांडेय,प्रो. पोटकुले हिरा तुकाराम ,शीतल पाटनवार,शत्रुघ्न जेसवानी,डॉ. विद्या प्रधान,सौरभ सराफ,निमाई प्रधान,जगदीश यादव, डॉ.राजेश दुबे, मनोहरण सिंह ठाकुर,बनवारी लाल देवांगन एवं अन्य सदस्य -साहित्यकारों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई है।
विनोद कुमार शुक्ल को विश्व हिन्दी अधिष्ठान की श्रद्धांजलि



