बरमकेला। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सुदूर ग्रामीण अंचलों में सरकारी स्कूलों का शैक्षणिक स्तर लगातार क्यों गिर रहा है, इसकी बानगी बरमकेला विकासखंड के प्राथमिक शाला चाँटीपाली में स्पष्ट रूप से देखने को मिली। सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के तमाम दावों के विपरीत, धरातल पर शिक्षकों की कथित गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली और निगरानी तंत्र की शिथिलता सीधे तौर पर नौनिहालों के भविष्य पर भारी पड़ रही है। ग्रामीणों की लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर जब मीडिया टीम दोपहर लगभग 3 बजे प्राथमिक शाला चाँटीपाली पहुंची, तो विद्यालय में प्रधान पाठक सहित नियमित शिक्षक मौके पर उपस्थित नहीं पाए गए। हैरानी की बात यह रही कि संकुल स्तर के जिम्मेदार अधिकारी राम जीवन नायक मौके पर मौजूद थे। ग्रामीणों की मौजूदगी में जब मीडिया प्रतिनिधियों ने उनसे शिक्षकों की अनुपस्थिति, दर्ज संख्या और शाला संचालन के संबंध में अधिकृत जानकारी और अवकाश दस्तावेज देखने चाहे, तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट करने के बजाय जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, व्यवस्थागत जवाबदेही तय करने के स्थान पर उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों को कथित रूप से जो करना है कर लो, मेरी राजनीतिक पहुंच नहीं जानते कहते हुए रसूख की धौंस दिखाने का प्रयास किया।
स्थानीय ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि नियमित शिक्षक घरेलू कार्यों और मुख्यालय आने-जाने के नाम पर शाला से अक्सर नदारद रहते हैं। शिक्षकों की अनुपस्थिति को छुपाने के लिए कथित तौर पर एक अतिरिक्त शिक्षिका को पढ़ाने का जिम्मा सौंपा गया है, जिससे अध्यापन की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वास्तविक दर्ज संख्या से अधिक उपस्थिति दर्शाकर शासकीय योजनाओं से जुड़ी राशियों का आहरण किया जा रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। जब मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठे, तो कैमरे के सामने आधिकारिक जानकारी देने से बचते हुए प्रशासनिक पदों से तुलनात्मक और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां की गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी मुकेश कुमार कुर्रे के कार्यालय पहुंचे, तो वे भी अपने विकासखंड के स्कूल की इस बदहाली से अनभिज्ञ नजर आए। मीडिया के सामने ही बीईओ ने फोन लगाकर संकुल समन्वयक जीवनराम नायक से वस्तुस्थिति की जानकारी मांगी जो मीडिया का स्कूल मे जवाब नही दिये। प्रभारी बीईओ ने फोन के माध्यम से पूछा कि शिक्षक किस आधार पर शाला में मौजूद नहीं थे। बीईओ ने मामले में संबंधितों से लिखित प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। लेकिन औपचारिक बयान देने से परहेज किया। जिले में सरकारी स्कूलों का रिजल्ट और शैक्षणिक स्तर गिरने के लिए ऐसे ही गैर-जिम्मेदार शिक्षक और उन्हें संरक्षण देने वाला तंत्र सीधे तौर पर जिम्मेदार है। जब लाखों रुपये का वेतन लेने वाले शिक्षक शाला से नदारद रहेंगे और मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारी राजनीतिक पहुंच का सहारा लेंगे, तो सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले गरीब बच्चों की शिक्षा की नींव कैसे मजबूत होगी? ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और शासन से मांग की है कि चाँटीपाली स्कूल के हाजिरी रजिस्टर, अवकाश स्वीकृति और मध्यान भोजन संबंधी रिकॉर्ड्स की स्वतंत्र जांच कराई जाए। शाला समय में अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों पर जाँच उपरान्त कठोर कार्रवाई हो और जिम्मेदारी से भागकर धौंस दिखाने वाले संकुल स्तर के अधिकारियों के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।



