रायगढ़। मेडिकल कालेज अस्पताल में डिलिवरी के पहुंची एक प्रसुता के डिलिवरी होने के बाद उसमें स्वाइन फ्लू का सिनटम दिखा गया, जिसकी जांच कराने पर पाजेटिव आते ही जच्चा-बच्चा को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। हालांकि यह जिले का सातवां मामला है, लेकिन सभी का उपचार के बाद स्वस्थ होना बताया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि मौसम में बदलाव के साथ अगस्त माह से ही स्वाइन फ्लू का केस बढऩे लगा है, जिससे अभी तक रायगढ़ जिला से करीब सात केस सामने आए हैं, लेकिन उक्त मरीजों का रायपुर-बिलासपुर में उपचार के बाद पूरी तरह से स्वास्थ्य हो चुके हैं। वहीं अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विगत चार दिन पहले रायगढ़ के ग्रामीण क्षेत्र की एक महिला डिलिवरी के लिए मेडिकल कालेज अस्पताल आई थी, जिसकी 4 सितंबर को डिलिवरी हुई, लेकिन लगातार उपचार के बाद भी उसके सेहत में सुधार नहीं हो रहा था। ऐसे में डाक्टरों द्वारा जांच करने पर प्रसुता में स्वाइन फ्लू का लक्षण दिखने पर सैंपल लेकर स्वाइन फ्लू जांच के लिए भेजा गया। जहां 8 सिंतबर को उसका रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद प्रसूता और उसके नवजात शिशु दोनों को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। साथ ही विशेषज्ञों द्वारा उनकी सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल दोनों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। स्वाइन फ्लू का केस आने के बाद जिस वार्ड में महिला भर्ती थी वहां भी सतर्कता बरती जा रही है, ताकि किसी और मरीज में इसका इंफेक्शन न फैल सके।
मेडिकल कालेज अस्पताल और जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए विशेष आईसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है, जिससे मेडिकल कालेज में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 12 वार्ड तैयार किया गया है तो वहीं जिला अस्पताल में दो बेड आरक्षित है। इसके साथ ही जांच व उपचार के लिए सारी व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी मरीज में इस तरह के लक्षण दिखाई दे तो तत्काल जांच कर उसका उपचार किया जा सके।
स्वाइन फ्लू का पहला मरीज मेकाहारा में भर्ती
डिलिवरी के बाद पहचान होने पर जच्च-बच्चा का उपचार जारी



