खरसिया। कैलाश शर्मा। कागजों पर फाइल दौड़ी, टेंडर की मुहर लगी और विभाग ने मान लिया कि सडक़ बन गई! लोक निर्माण विभाग की इसी कागजी बाजीगरी और अफसरों की बेपरवाही का खामियाजा आज खरसिया छाल और एडू क्षेत्र की हजारों जनता भुगत रही है। वर्षों के विरोध-प्रदर्शन के बाद जिस सडक़ के निर्माण को मंजूरी मिली थी, वह आज भी अफसरों की फाइलों में धूल फांक रही है और जमीन पर ग्रामीणों का खून बहा रही है।
तालाब में तब्दील मार्ग, इंजीनियरों को नहीं दिखता मौत का कुआं
मानसून की पहली बारिश ने ही पीडब्ल्यूडी के दावों की पोल खोलकर रख दी है। छाल-एडू मार्ग पर गिट्टी और डामर का नामोनिशान मिट चुका है, जगह-जगह इतने गहरे गड्ढे हैं कि सडक़ तालाबनुमा नजर आ रही है। जान जोखिम में डाल रहे राहगीर पानी भरे गड्ढों की गहराई का अंदाजा न होने से आए दिन दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर ब्रेक छात्र-व्यापारी बेहाल
एम्बुलेंस और आपातकालीन वाहन गड्ढों में फंस रहे हैं, जिससे मरीजों की जान पर बन आई है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चे और रोजमर्रा की मजदूरी करने वाले लोग कीचड़ से सने कपड़ों में सफर करने को मजबूर हैं।
जिम्मेदार सोए, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
जब टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो आखिर निर्माण कार्य शुरू कराने में पीडब्ल्यूडी के आला अधिकारी और ठेकेदार क्यों हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं? तकनीकी या प्रशासनिक वजहों से अगर पक्का निर्माण रुका भी था, तो क्या विभाग के पास इतने संसाधन भी नहीं थे कि मुरुम या गिट्टी डालकर सडक़ को चलने लायक बनाया जा सके? ?जनता यह सवाल पूछ रही है कि एसी कमरों में बैठकर फाइलों पर दस्तखत करने वाले पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों और अधिकारियों ने कभी मौके पर जाकर इस नरक का जायजा लेने की जहमत क्यों नहीं उठाई? कागजी मंजूरी से पेट नहीं भरता और न ही गड्ढे भरते हैं राहत तब मिलेगी जब जमीन पर काम दिखेगा।
प्रशासन को सीधी चेतावनी सुधारो या आंदोलन झेलो
ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर गड्ढों की अस्थायी मरम्मत और पक्के निर्माण का काम तुरंत शुरू नहीं कराया, तो वे सडक़ों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया लोक निर्माण विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है या फिर जनहित में तुरंत ठोस कार्रवाई करता है।



