धरमजयगढ़। उरगा-पत्थलगांव भारतमाला सडक़ परियोजना के तहत ग्राम सिसरिंगा के मंदिर क्षेत्र में सार्वजनिक संपत्तियों को हुई क्षति की शिकायत पर वन विभाग की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब विभाग की जांच प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगे हैं।
वन विभाग ने अपने जांच प्रतिवेदन में शिकायत को सही माना है और मौके पर मंदिर, शौचालय, कुआं एवं भवन जैसी सार्वजनिक संपत्तियों को क्षति पहुंचने की बात दर्ज की है। साथ ही सडक़ की चौड़ाई राइट ऑफ वे के अनुसार 80 मीटर होना जांच में सही पाया गया है।
लेकिन शिकायत में उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण सवालों पर जांच प्रतिवेदन स्पष्ट जवाब देता नजर नहीं आता। खासतौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जिन निर्माण गतिविधियों को लेकर शिकायत की गई थी, उनमें राइट ऑफ वे से बाहर कोई निर्माण हुआ था या नहीं। इसी तरह वन अधिनियम अथवा वन संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति पर भी जांच रिपोर्ट में कोई स्पष्ट निष्कर्ष या कार्रवाई का उल्लेख दिखाई नहीं देता।
यानी विभाग ने एक तरफ शिकायत को सही माना और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान की पुष्टि की, लेकिन दूसरी तरफ शिकायत के उन महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्पष्टता नहीं दी गई जिनमें आरओडब्ल्यू की सीमा के बाहर निर्माण और वन संबंधी कानूनों के संभावित उल्लंघन का सवाल शामिल था।
अब सवाल यह है कि यदि शिकायत सही पाई गई, तो शिकायत में उठाए गए प्रत्येक बिंदु पर जांच क्यों नहीं की गई? क्या केवल सडक़ की चौड़ाई नाप लेना ही पर्याप्त जांच थी, या यह भी जांचा गया कि निर्माण गतिविधियां निर्धारित आरओडब्ल्यू की सीमा के भीतर ही हुई थीं? इसके अलावा यदि वन अधिनियम के उल्लंघन की आशंका शिकायत में उठाई गई थी, तो क्या इस पहलू की जांच की गई? यदि की गई तो उसका निष्कर्ष क्या रहा? और यदि जांच नहीं की गई तो क्यों?
सबसे अहम बात यह है कि विभागीय पत्र में निर्माण एजेंसी द्वारा 1000 रुपये के स्टाम्प पर कथित शपथ पत्र देकर क्षतिग्रस्त संपत्तियों के पुनर्निर्माण का आश्वासन दिए जाने का उल्लेख है, लेकिन वह दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि उस लिखित दस्तावेज में सभी क्षतिग्रस्त संपत्तियों का उल्लेख है या नहीं। अब मामला केवल पुनर्निर्माण के आश्वासन तक सीमित नहीं है। शिकायत सही पाई गई है तो फिर जांच के सभी सवालों के स्पष्ट जवाब कब सामने आएंगे? पुनर्निर्माण कब शुरू होगा? और संभावित वन कानून के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई हुई? इन सवालों का जवाब विभाग को स्पष्ट रूप से देना होगा। -ऋषभ तिवारी
भारतमाला आर.ओ.डब्ल्यू. अनियमितता मामले में वन विभाग का गोलमोल जवाब!
शिकायत सही मानी, लेकिन एलाइनमेंट, राइट ऑफ वे अधिनियम पर चुप्पी!



