पखांजूर। लगातार हो रही भारी बारिश के बीच पहली बार कांकेर कलेक्टर नीलेश कुमार श्रीसागर और पुलिस अधीक्षक निखिल कुमार राखेचा ने नक्सल प्रभावित अंदरूनी क्षेत्र का दौरा किया। खराब मौसम और उफनती नदियों के बावजूद दोनों अधिकारी नाव के सहारे उफनती कोटरी नदी पार कर कंदारी पहुंचे। उनके साथ जिला पंचायत, स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारियों की टीम भी मौजूद रही। गौरतलब है कि हाल ही में कंदारी और आल्दण्ड क्षेत्र में मलेरिया के बढ़ते प्रकोप की खबर सामने आई थी। इसी को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने मौके पर पहुंचकर स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा की और स्वास्थ्य विभाग की टीम तथा चिकित्सकों को मलेरिया की रोकथाम, समय पर जांच, दवा वितरण, सर्वे एवं उपचार अभियान में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के सख्त निर्देश दिए। दौरे के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं भी सुनीं। ग्रामीणों ने कंदारी क्षेत्र में स्कूल की मांग रखते हुए बताया कि शिक्षा सुविधा के अभाव में बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस पर कलेक्टर ने मांग पर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उनकी कुछ कृषि भूमि नारायणपुर जिले की सीमा में होने के कारण धान पंजीयन कराने में दिक्कत आती है। कलेक्टर ने इस समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया। इसके अलावा कई ग्रामीणों ने वन अधिकार पट्टा की मांग रखी, जबकि कुछ परिवारों ने अधिक भूमि दर्ज होने के कारण राशन कार्ड नहीं बनने की समस्या बताई। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को सभी मामलों का परीक्षण कर शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए। दौरे के दौरान कलेक्टर और एसपी ने अंदरूनी क्षेत्रों में निर्माणाधीन सडक़ एवं पुल-पुलियों का भी निरीक्षण किया और कार्यों की गुणवत्ता तथा प्रगति की जानकारी ली। साथ ही क्षेत्र में स्थापित किए जा रहे मोबाइल टावरों के कार्य की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश टावरों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इन्हें 15 अगस्त तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे लंबे समय से संचार सुविधा से वंचित ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी। भारी बारिश और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच प्रशासन के इस दौरे को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, विकास कार्यों की गति बढ़ाने तथा ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।



