रायगढ़। निष्काम सेवा, परमार्थ और सत्कर्म ही मनुष्य जीवन को सार्थक बनाते हैं। स्वार्थ की सीमाओं में बंधा जीवन व्यक्ति को क्षणिक सुख तो दे सकता है, किंतु वास्तविक कल्याण तभी संभव है जब मनुष्य अपने अस्तित्व को समाज और मानवता के हित में समर्पित कर दे। उक्त प्रेरक आशीर्वचन अघोर गुरुपीठ बनोरा के पीठाधीश्वर पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम ने प्रयागराज स्थित बनोरा ट्रस्ट की इकाई प्रेरणा परमार्थ आश्रम में कर्मयोगी श्रद्धेय भइया जी के द्वितीय निर्वाण दिवस पर शुक्रवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा एवं आध्यात्मिक सत्संग के दौरान व्यक्त किए। 19 जून शनिवार को प्रेरणा परमार्थ आश्रम प्रयागराज में आयोजित इस श्रद्धा, साधना और चिंतन महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से अघोर गुरुपीठ से जुड़े साधक, श्रद्धालु एवं अनुयायी बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। कार्यक्रम का वातावरण भक्ति, आध्यात्मिक चिंतन और गुरु-स्मरण से ओतप्रोत रहा।पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी ने आशीर्वचन के दौरान समस्त दैवी शक्तियों का वैदिक आह्वान करते हुए कहा कि संतों का जीवन सदैव निष्काम भाव से लोकमंगल के लिए समर्पित रहता है। परमार्थ के मार्ग का अनुशरण करते वे समाज को भी उसी पथ पर चलने हेतु प्रेरित करते है । पूज्य गुरुदेव ने कहा कि ईश्वर को छल, कपट, अहंकार और दंभ से भरा हुआ व्यक्ति कभी प्रिय नहीं हो सकता । भगवान के निकट वही मनुष्य पहुंचता है जिसका हृदय निर्मल हो, जिसकी वाणी में मधुरता हो और जिसके कर्म समाज के हित में समर्पित हों। कर्मयोगी श्रद्धेय भइया जी के जीवन-दर्शन का उल्लेख करते हुए बाबा जी ने कहा कि उनका संपूर्ण जीवन सेवा, साधना और मानवीय मूल्यों के संरक्षण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने सदैव लोगों को जाति, वर्ग और स्वार्थ की संकीर्णताओं से ऊपर उठकर समाजहित में कार्य करने की प्रेरणा दी। पूज्य गुरुदेव ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान है । इसे केवल भौतिक उपलब्धियों और निजी सुख-सुविधाओं तक सीमित कर देना उसके वास्तविक उद्देश्य से विमुख होना है। संतों का एकमात्र यही उद्देश्य रहता है कि मनुष्य के जीवन को सार्थक कैसे बनाएं। जीवन की सार्थकता अच्छे कर्मों, जरूरतमंदों की सहायता, दीन-दुखियों की सेवा तथा निरंतर परमार्थ के कार्यों में निहित है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में सेवा, करुणा, सह-अस्तित्व और मानवता के आदर्शों को आत्मसात करें। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने कर्मयोगी भइया जी की छाया प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।



