पखांजुर। परलकोट क्षेत्र के पी.वी. 85 नयापारा में हुई कथित अवैध बुलडोजर कार्रवाई अब बड़े जनआंदोलन का रूप लेती दिख रही है। बंग समाज का गुस्सा सडक़ों पर खुलकर सामने आ गया है। निखिल भारत बंगाली समन्वय छत्तीसगढ़ राज्य कमेटी के नेतृत्व में बुलाए गए बंद का असर पूरे इलाके में व्यापक रूप से देखने को मिला। सुबह से ही पखांजुर, बांदे, छोटेबेटिया और कापसी सहित आसपास के क्षेत्रों में बाजार पूरी तरह बंद रहे। व्यापारिक प्रतिष्ठानों के शटर डाउन रहे और सडक़ों पर हजारों की संख्या में लोग उतरकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते नजर आए। पूरे इलाके में एक तरह का जनआक्रोश साफ दिखाई दिया।
17 अप्रैल की कार्रवाई बनी विवाद की जड़
बताया जा रहा है कि 17 अप्रैल को प्रशासन और ग्राम पंचायत की संयुक्त टीम ने बाढ़ प्रभावित 6 परिवारों के मकानों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद सभी परिवार बेघर हो गए हैं। भीषण गर्मी के बीच छोटे-छोटे बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर इन परिवारों की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना पर्याप्त सूचना, नोटिस और वैकल्पिक व्यवस्था के यह कार्रवाई की गई, जिसे वे अमानवीय और अन्यायपूर्ण करार दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री आवास भी टूटे, बढ़ा आक्रोश
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह सामने आया कि जिन मकानों को तोड़ा गया, उनमें से दो मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने हुए थे। इस खुलासे के बाद लोगों का गुस्सा और भडक़ गया और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। चार सूत्रीय मांगों के साथ प्रशासन को चेतावनी आंदोलन के दौरान बंग समाज ने एकजुट होकर अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपा और चार प्रमुख मांगें रखीं जिसमे कथित अवैध और बर्बरतापूर्ण कार्रवाई के जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई प्रभावित परिवारों को उसी स्थान (खसरा नंबर 113, रकबा 1.5) पर पुन: आवासीय भूमि देकर पुनर्वास सभी पीडि़तों को आर्थिक नुकसान और संपत्ति क्षति का उचित मुआवजा दिया जाए। वर्षों से निवासरत बंगाली व आदिवासी परिवारों को उनकी जमीन का वैध पट्टा प्रदान करना। प्रदर्शन के दौरान बंग समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र और व्यापक किया जाएगा। फिलहाल परलकोट क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।



