रायगढ़। गणेश तालाब में बीते कुछ दिनों से हर दिन मछलियों की मौत हो रही है। तालाब में करीब 4 से 5 हजार अलग-अलग प्रजातियों की मछलियां मौजूद हैं, लेकिन सबसे ज्यादा रोहू-कतला मछलियां मर रही हैं।
प्रतिदिन 20 से 25 मछलियों के मरने से तालाब के आसपास वॉक करने आने वाले लोग हैरान हैं। अब नगर निगम इन मछलियों को शिफ्ट करने या तालाब का पानी बदलने की योजना बना रहा है। गौशाला रोड स्थित गणेश तालाब का 2011-12 में सौंदर्यीकरण किया गया था। उस दौरान नगर निगम और आसपास के लोगों ने तालाब में रोहू-कतला के बीज डाले थे। समय के साथ मछलियां बड़ी होती गईं। बाद में इसमें मांगुर और कुछ रंगीन (समुद्री/एक्वेरियम) मछलियां भी छोड़ी गईं, जिससे लोग इन्हें देखने पहुंचने लगे। अब रोहू-कतला मछलियों का वजन 1 किलो से 5 किलो तक हो गया है। ऐसे में सुबह-शाम वॉक पर आने वाले लोग इन्हें आटा, बिस्किट और अन्य खाद्य सामग्री खिलाने लगे। लगभग आधे एकड़ के तालाब में मछलियों की संख्या बढक़र 5 हजार से अधिक हो गई। करीब 18 से 20 दिन पहले तालाब में कुछ मछलियां मरी हुई मिली थीं, लेकिन तब इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद लगातार हर दिन 20-25 मछलियों के मरने पर लोगों ने क्षेत्र के पार्षद को सूचना दी।
तालाब में जरूरत से ज्यादा मछली
पार्षद सलीम नियारिया ने मामले की जानकारी नगर निगम और मत्स्य विभाग को दी। इसके बाद मत्स्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तालाब में मछलियों की संख्या जरूरत से ज्यादा हो गई है और लोग नियमित रूप से खाने-पीने की चीजें डाल रहे हैं। यह सामग्री नीचे जमा होकर सड़ रही है, जिससे पानी में गंदगी बढ़ रही है और कीड़े पैदा हो रहे हैं। आशंका है कि यही कारण मछलियों की मौत का बन रहा है।
रंगीन मछलियां सुरक्षित
तालाब का पानी काफी गंदा हो चुका है। मंगलवार को भी बड़ी संख्या में मछलियां मृत मिलीं, जिन्हें पानी से बाहर निकाला गया। हालांकि, बताया जा रहा है कि रंगीन मछलियों पर इसका असर नहीं हो रहा, लेकिन कुछ समय पहले कीचड़ खाने वाली एक मछली भी मरी मिली थी।
चूना और क्लीनर डालने के बाद भी असर नहीं
मत्स्य विभाग के निरीक्षण के बाद पार्षद को तालाब में चूना और क्लीनर डालने की सलाह दी गई। तय मात्रा के अनुसार चूना और क्लीनर डाला गया, लेकिन मछलियों के मरने की संख्या कम नहीं हुई। अब नगर निगम और प्रशासन तालाब की मछलियों को केलो डेम में शिफ्ट करने या तालाब का पानी बदलने की योजना बना रहा है।
निगम के अधिकारियों से किया चर्चा
पार्षद सलीम नियारिया ने बताया कि मछलियों के लगातार मरने की जानकारी मत्स्य विभाग और नगर निगम में दी गई है। मत्स्य विभाग के अधिकारी बता रहे हैं कि पानी खराब हो गया है और ज्यादा आटा और अन्य समान खिलाने से वह नीचे सड़ रहा है। इसकी वजह से मछलियों में पैरासाईट (परजीवी) लग रहा है और मरी हुई मछलियों में वह देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि मछलियों को दूसरे जगह शिप्ट करने या पानी बदलने से उनकी जान बच सकती है। इसके लिए निगम के अधिकारियों के साथ प्लानिंग की जा रही है।
पानी दुषित होने से मर रही गणेश तालाब की मछलियां
आटा-बिस्किट खिलाने से पानी हो रहा खराब, तालाब में 1 से 5 किलो तक की मछलियां



