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NavinKadam > रायगढ़ > धान में बाली निकलने की अवस्था में कीटों से बचाव करना है जरूरी
रायगढ़

धान में बाली निकलने की अवस्था में कीटों से बचाव करना है जरूरी

नियमित करें खेतों की निगरानी, पैनिकल माइट, भूरा माहू, गंधी बग, तना छेदक एवं पत्ती लपेटक की समय पर पहचान कर अपनाएं नियंत्रण उपाय

lochan Gupta
Last updated: September 24, 2026 12:03 am
By lochan Gupta September 24, 2026
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4 Min Read

रायगढ़। धान की फसल वर्तमान में प्रारंभिक बाली निकलने की अवस्था में है। इस समय फसल में विभिन्न कीटों एवं रोगों का प्रकोप बढऩे की संभावना रहती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने तथा कीटों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है। वर्तमान में धान की फसल में पैनिकल माइट (मकड़ी), भूरा माहू, गंधी बग, तना छेदक एवं पत्ती लपेटक जैसे प्रमुख कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है।
पैनिकल माइट के प्रकोप में लीफ शीथ बदरंग भूरी होने लगती है तथा पत्तियों पर छोटे भूरे धब्बे दिखाई देते हैं। अधिक प्रकोप की स्थिति में दाने अनियमित आकार के होकर कत्थई, पोचे या बदरा रह सकते हैं। इसकी पहचान के लिए पत्ती की बाहरी शीथ को हटाकर मकड़ी की उपस्थिति देखी जा सकती है। इसके नियंत्रण के लिए संतुलित उर्वरक, विशेषकर नत्रजन का संतुलित उपयोग तथा नियमित निगरानी जरूरी है। रासायनिक नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का उपयोग कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार किया जा सकता है।
भूरे माहू के कीट तने के आधार के पास रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां पीली पडऩे लगती हैं और पौधे नीचे से ऊपर की ओर सूखते हैं। गंभीर प्रकोप में पौधों का समूह पीला, फिर भूरा होकर सूख जाता है, जिसे हॉपर बर्न कहा जाता है। पौधों के आधार पर मधुरस एवं काली फफूंद भी दिखाई दे सकती है। प्रति हिल 5 से 10 कीट दिखाई देने पर नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। इसके लिए अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करते समय छिडक़ाव पौधे के जड़ के पास केंद्रित रखना प्रभावी माना जाता है।
गंधी बग दानों में दूध भरने की अवस्था में नुकसान पहुंचाता है। यह दानों से रस चूसता है, जिससे दाने सिकुड़े, धब्बेदार अथवा पोचे रह जाते हैं। खेत में भूरे-हरे रंग के निम्फ एवं वयस्क कीटों की उपस्थिति तथा बदबूदार गंध इसके प्रकोप की पहचान है। इसके नियंत्रण के लिए खेत एवं आसपास के क्षेत्र से खरपतवार हटाने तथा संतुलित उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी गई है। तना छेदक की इल्ली तने के अंदर प्रवेश कर नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण सूखा तना तथा सूखी या सफेद बालियां बनती हैं, जो खींचने पर आसानी से बाहर निकल जाती हैं। वहीं पत्ती लपेटक कीट पत्तियों को मोडक़र धागों से किनारों को जोड़ देता है। मुड़ी हुई पत्ती के अंदर लार्वा एवं मल पदार्थ दिखाई दे सकते हैं। अधिक प्रकोप में खेत जला हुआ दिखाई देने लगता है। किसानों को खेत एवं मेड़ों से जंगली घास हटाने तथा नियमित निगरानी रखने की सलाह दी गई है।
किसानों से कहा गया है कि किसी भी कीट का प्रकोप दिखाई देने पर बिना पहचान के कीटनाशकों का प्रयोग न करें। कीट की सही पहचान एवं अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही दवा का छिडक़ाव करें, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके और अनावश्यक कीटनाशक उपयोग से भी बचा जा सके।

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