रायगढ़। 41वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 की आठवीं सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने भगवान श्री गणेश के चरणों में नमन एवं वंदन तथा कला सम्राट महाराजा चक्रधर के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी पुण्य स्मृतियों को याद किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रस्तुति देने पहुंचे कलाकारों का सम्मान किया। कार्यक्रम में महापौर जीवर्धन चौहान ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि चक्रधर समारोह का यह आठवां दिन है और इस अवसर का साक्षी बनना सौभाग्य की बात है। उन्होंने चक्रधर समारोह के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि देशभर के कलाकार इस समृद्ध सांस्कृतिक मंच पर अपनी कला प्रस्तुत करने का इंतजार करते हैं। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर ने कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके कला प्रेम और साधना की विरासत को चक्रधर समारोह आज भी आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है और लगातार दस दिनों तक चलने वाला यह आयोजन प्रदेश की समृद्ध कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं का भव्य मंच है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि चक्रधर समारोह के इस प्रतिष्ठित मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करना किसी भी कलाकार के लिए गौरव और सम्मान की बात है। यह आयोजन न केवल कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देता है, बल्कि नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और परंपराओं से जोडऩे का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
इस अवसर पर सभापति डिग्रीलाल साहू, अरूणधर दीवान, श्रीकांत सोमावार, सुभाष पाण्डेय, विकास केडिया, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, आयुक्त नगर निगम बृजेश सिंह क्षत्रिय सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
आठवीं संध्या में मायरा ने दी कथक की प्रस्तुति
रायगढ़ घराने की युवा कलाकार ने अपनी नृत्य प्रतिभा दिखाई

रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह की आठवीं संध्या में रायगढ़ की युवा कथक कलाकार मायरा श्रीवास्तव ने कथक की प्रस्तुति दी। कक्षा 9वीं में अध्ययनरत मायरा पिछले तीन वर्षों से गुरु पूजा जैन से रायगढ़ घराने की कथक शैली का प्रशिक्षण ले रही हैं।माइरा ने अपनी प्रस्तुति में कथक की मुद्राओं और भाव-भंगिमाओं के साथ नृत्य प्रस्तुत किया। मंच पर उनके आत्मविश्वास और भावपूर्ण प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा।
मायरा को रस बनारस, मधुगुंजन रायगढ़ और प्रणवम बिलासपुर में प्रथम पुरस्कार मिल चुका है। पढ़ाई के साथ वे लगातार कथक का अभ्यास कर रही हैं और रायगढ़ घराने की परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रशिक्षण ले रही हैं।
चक्रधर समारोह: कथक की प्रस्तुति से छाईं नन्हीं निमृत

रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह की आठवीं संध्या में 6 वर्षीय कथक नृत्यांगना निमृत पात्रा ने शानदार कथक प्रस्तुति दी। श्रीमती जया मानिकपुरी के मार्गदर्शन में कथक का प्रशिक्षण ले रहीं निमृत ने अपनी प्रस्तुति में भाव-भंगिमाओं और नृत्य की बारीकियों का सुंदर प्रदर्शन किया।
कम उम्र में ही निमृत ने कई मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखाई है। उन्होंने रायपुर साहित्य उत्सव 2026, पाली महोत्सव 2026 और अमरकंटक नर्मदा महोत्सव में कथक की प्रस्तुतियां दी हैं। रायगढ़ में आयोजित मधुगुंजन सतरंग 2025 की अखिल भारतीय नृत्य, संगीत एवं कला प्रतियोगिता में कथक के माइनर वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा बिलासपुर के स्वदेशी मेला 2024 में सब-जूनियर ग्रुप डांस प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान हासिल किया। एसईसीएल 79वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में कथक नृत्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। निमृत ने वर्ष 2025 में भुवनेश्वर के रवीन्द्र मंडप में आयोजित राष्ट्रीय महोत्सव ‘त्रिधारा 39वां श्रद्धांजलि समारोह’ में भी कथक की प्रस्तुति दी थी।
चक्रधर समारोह: ओडिसी नृत्य में नैना कुसुम ने प्रस्तुत किया दुर्गा तांडव

रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह की आठवीं संध्या में ओडिसी नृत्यांगना नैना कुसुम ने ऊर्जावान और प्रभावशाली ‘दुर्गा तांडव’ की प्रस्तुति दी। शक्ति और भक्ति भाव से सजी इस प्रस्तुति में उन्होंने मां दुर्गा के पराक्रम और महिषासुर मर्दिनी स्वरूप को नृत्य के माध्यम से जीवंत किया। नैना कुसुम गुरु आर्य नंदे की शिष्या हैं और पिछले पांच वर्षों से रायपुर में ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने देश के प्रमुख सांस्कृतिक मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें ताज फेस्टिवल, आगरा, ऑल इंडिया डांस फेस्टिवल, भिलाई-दुर्ग और देवप्रसाद फेस्टिवल 2026, भुवनेश्वर प्रमुख हैं।
‘दुर्गा तांडव’ ओडिसी की शक्तिशाली और आकर्षक नृत्य रचना है। इसकी रचना आदि गुरु शंकराचार्य से जुड़ी है। प्रस्तुति में गीत निर्देशन गुरु लक्ष्मीकांत पालित, स्वर-संगीत की रचना गुरु धनेंद्रश्वर तथा नृत्य निर्देशन गुरु डॉ. गजेंद्र कुमार पांडा का रहा। नैना कुसुम ने अपनी प्रस्तुति में भाव, लय और ऊर्जा का सुंदर समन्वय करते हुए दर्शकों को प्रभावित किया।
चक्रधर समारोह की 8वीं संध्या में गूंजा ‘वंदे मातरम’, नृत्य नाटिका में दिखा स्वतंत्रता संग्राम

रायगढ़। चक्रधर समारोह की 8वीं संध्या में संस्कार कला संघ, जबलपुर द्वारा ‘वंदे मातरम की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में विशेष नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई। नृत्य, अभिनय, संगीत और संवाद के माध्यम से कलाकारों ने स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारियों के त्याग व बलिदान की गाथा को मंच पर जीवंत किया।
नृत्य नाटिका में दिखाया गया कि किस तरह ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का स्वर बना। क्रांतिकारियों द्वारा मातृभूमि की आजादी के लिए किए गए संघर्ष और बलिदान के प्रसंगों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। साथ ही ‘वंदे मातरम की रचना और उसके ऐतिहासिक महत्व को भी नाटिका के माध्यम से सामने रखा गया।प्रस्तुति के जरिए दर्शकों को स्वतंत्रता संग्राम के दौर की भावनाओं से जोडऩे के साथ नई पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और देशभक्ति से परिचित कराने का संदेश दिया गया। नृत्य नाटिका का निर्देशन कमलेश यादव ने किया। इसमें संस्कार कला संघ, जबलपुर के 18 कलाकारों ने सहभागिता की।
चक्रधर समारोह की 8वीं संध्या में आर्या नंदे ने प्रस्तुत किया ओडिसी नृत्य

रायगढ़। चक्रधर समारोह की 8वीं संध्या में अंतरराष्ट्रीय ओडिसी नृत्यांगना सुश्री आर्या नंदे ने ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। गुरु देव प्रसाद दास परंपरा की इस प्रस्तुति में शास्त्रीय नृत्य की भाव-भंगिमाओं, लय और नृत्य की बारीकियों का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ से ताल्लुक रखने वाली आर्या नंदे ने भुवनेश्वर की प्रसिद्ध संस्था ‘त्रिधारा’ में डॉ. गुरु गजेंद्र कुमार पांडा के सान्निध्य में ओडिसी नृत्य की शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी कला प्रस्तुत की है, जिनमें चक्रधर समारोह, खजुराहो नृत्य महोत्सव, कोणार्क महोत्सव और ताज महोत्सव प्रमुख हैं। इसके अलावा जापान, मलेशिया, सिंगापुर, सऊदी अरब और दुबई में भी उन्होंने ओडिसी नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति की प्रस्तुति दी है। आर्या नंदे को छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा के पूर्व राज्यपालों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें ‘चक्रधर गौरव सम्मान’, ‘देवधारा सम्मान’ और आईसीसीआर सम्मान सहित विभिन्न सम्मानों से नवाजा गया है। उन्होंने एमए (अंग्रेजी साहित्य) के साथ संगीत भास्कर की शिक्षा भी प्राप्त की है।
चक्रधर समारोह की आठवीं संध्या में नृत्यांजलि समूह ने पेश किया बनारस घराने का कथक

रायगढ़। चक्रधर समारोह 2026 की आठवीं संध्या में नृत्यांजलि समूह में प्रणधा बिस्वाल, प्रियल प्रजापत, आद्या नायक एवं डिंपल रूपडजा ने बनारस घराने के कथक की मनोहारी प्रस्तुति दी। घुंघरुओं की झंकार, तबले की थाप और भाव-भंगिमाओं के साथ कलाकारों ने बनारस घराने की कथक शैली की सुंदर झलक प्रस्तुत की। प्रस्तुति में लय, ताल, पद-संचालन और भावों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कलाकारों की शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति को दर्शकों ने तालियों के साथ सराहा। इस प्रस्तुति में तबला एवं पढ़त पर तबला तालमणि, अंतरराष्ट्रीय तबला वादक एवं छत्तीसगढ़ रत्न से सम्मानित गुरु मोरध्वज वैष्णव, गायन संगत पर श्री नवीन प्रकाश महंत तथा वायलिन संगत पर श्री राजेंद्र विश्वकर्मा ने साथ दिया।
सोनू गुप्ता एवं ग्रुप की प्रस्तुति में गूंजा छत्तीसगढ़ का लोक रंग

रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सांस्कृतिक संध्या में रायगढ़ के सुप्रसिद्ध सोनू गुप्ता एवं ग्रुप ने अपनी मनमोहक लोक संगीत प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ी लोक कला, लोक रंग और लोक संस्कृति की समृद्ध छटा बिखेरी। 10 कलाकारों के दल ने पारंपरिक लोकधुनों और सुमधुर गायन के माध्यम से दर्शकों को छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत अनुभव कराया।
करीब 20 वर्षों से लोक कला के क्षेत्र में सक्रिय गुरतुर लोक कला मंच छत्तीसगढ़ के साथ ही ओडिशा और मध्यप्रदेश में भी अपनी प्रस्तुतियां दे चुका है। मंच के मुख्य गायक सोनू गुप्ता ने अपनी गायिकी और लोक कला के माध्यम से रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को प्रदेश और देश के विभिन्न मंचों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
समारोह में सोनू गुप्ता एवं ग्रुप के कलाकारों ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोक संगीत और लोक संस्कृति से जुड़ी विविध प्रस्तुतियां दीं। गायन, वादन और लोकधुनों के सुंदर संयोजन ने समारोह स्थल को छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में रंग दिया। कलाकारों की प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। सोनू गुप्ता एवं ग्रुप की प्रस्तुति ने यह संदेश भी दिया कि लोक कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी मिट्टी, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
बनारस घराने के कथक से रुद्रशंकर मिश्रा ने किया महाराजा चक्रधर सिंह को नमन
तीन ताल, इंद्रजाल और ‘काशी के बसइया’ से सजी कथक की प्रस्तुति
घुंघरुओं की थाप पर दिखी बनारस घराने के कथक की खासियत

रायगढ़। चक्रधर समारोह की आठवीं संध्या में बनारस घराने के प्रख्यात कथक कलाकार रुद्रशंकर मिश्रा ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को कथक की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया। उन्होंने बनारस घराने की शैली में तीन ताल, इंद्रजाल, झूला, शिव का झूला और ‘काशी के बसइया’ की प्रस्तुति दी।
रुद्रशंकर मिश्रा ने अपनी प्रस्तुतियों में लय, ताल, पद-संचालन और भावों का सुंदर संयोजन किया। बनारस घराने की विशिष्ट शैली में उनके घुंघरुओं की थाप और नृत्य की बारीकियों ने प्रस्तुति को प्रभावी बनाया। रुद्रशंकर मिश्रा बनारस घराने के चर्चित प्रतिनिधि कलाकार हैं। उन्होंने अपने कथक के माध्यम से रायगढ़ घराने के प्रवर्तक महाराजा चक्रधर सिंह को कला नमन किया। उनकी प्रस्तुति में बनारस घराने की परंपरा के साथ रायगढ़ की कला विरासत के प्रति सम्मान भी दिखाई दिया।
वासंती वैष्णव एवं शिष्य-शिष्याओं ने कथक में जीवंत की रायगढ़ घराने की परंपरा
रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह की 8वीं संगीत संध्या में कथक विदुषी श्रीमती वासंती वैष्णव एवं उनके शिष्य-शिष्याओं ने शानदार कथक प्रस्तुति से रायगढ़ घराने की समृद्ध परंपरा को मंच पर जीवंत कर दिया। लय, ताल, भाव और नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
रायगढ़ घराने के प्रसिद्ध कथक साधक पंडित फिरतु महाराज की पुत्री एवं प्रमुख शिष्या वासंती वैष्णव ने बाल्यकाल से ही कथक की शिक्षा प्राप्त की। पंडित राममूर्ति वैष्णव एवं पंडित सुनील वैष्णव से भी उन्होंने कथक की बारीकियां सीखीं। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली वासंती वैष्णव को कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2014 में छत्तीसगढ़ शासन के चक्रधर सम्मान से सम्मानित किया गया है।
‘गंगा अवतरण’ से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
वासंती वैष्णव ने अपने शिष्य-शिष्याओं ज्योतिश्री वैष्णव, सृष्टि गर्ग, ओजस्विता रॉयल, साँईश्री इजारदार, अनन्या श्रीवास, प्रिंसी तिवारी, प्रभ्नूर कौर सलूजा, सिया छत्रे एवं स्वप्निल बोरकर के साथ ठाकुर वेदमणि सिंह की कालजयी रचना ‘गंगा अवतरण’ से प्रस्तुति का शुभारंभ किया। इसके बाद कलाकारों ने विशुद्ध रायगढ़ घराने की शैली में विलास पारण, कृष्ण लास्य त्रोतकम, कडक़ बिजली, चमक बिजली, तत्कार एवं लय बाट प्रस्तुत कर कथक की जटिल लयकारी और नृत्य कौशल का परिचय दिया। अंत में भगवान श्रीकृष्ण पर आधारित भजन ‘ब्रज के नंद लाला, राधा के साँवरिया’ की भावपूर्ण प्रस्तुति से कार्यक्रम का समापन हुआ।




