रायगढ़। बरौद के विस्थापित परिवारों ने वर्षों से लंबित अपनी मांगों को लेकर प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। प्रभावितों ने आरोप लगाया है कि भूमि अधिग्रहण के बाद से उनके निजी मकानों, प्रधानमंत्री आवासों और जल स्रोतों का आज तक मूल्यांकन नहीं किया गया है।
विस्थापितों ने कलेक्टर, एसईसीएल उपक्षेत्रीय प्रबंधक और एसडीएम घरघोड़ा को ज्ञापन सौंपकर तत्काल संयुक्त सर्वे टीम गठित करने की मांग की है। प्रभावितों का कहना है कि विस्थापन में देरी के कारण परिवारों का विस्तार हुआ है और उन्होंने अपनी जरूरतों के लिए निर्माण किए हैं, जिनका मुआवजा उन्हें मिलना चाहिए। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बरौद खदान के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे।
बरौद विस्थापितों का प्रशासन और एसईसीएल को अल्टीमेटम!
घरघोड़ा के बरौद में विस्थापित परिवारों ने अपने हक की आवाज बुलंद कर दी है। बरौद के प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के सामने 3 सूत्रीय मांगें रखी हैं:
निर्माण कार्यों का सर्वे: निजी मकानों, पीएम आवास, कुओं और बोरवेल का अविलंब मूल्यांकन हो। न्यायोचित मुआवजा: पात्र परिवारों को विस्थापन का उचित मुआवजा मिले। संयुक्त टीम का गठन: प्रशासन और एसईसीएल मिलकर जल्द सर्वे प्रक्रिया शुरू करें। ज्ञापन सौंपने के बाद विस्थापितों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगों को अनदेखा किया गया, तो वे बरौद खुली खदान का काम ठप कर अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठने को मजबूर होंगे।
बरौद विस्थापित परिवारों के लंबित सर्वे एवं पुनर्वास मुआवजे के संबंध में।
बरौद क्षेत्र के विस्थापित परिवारों द्वारा लंबे समय से अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया जा रहा है। विस्थापन प्रक्रिया के दौरान हुए परिवार विस्तार के कारण निर्मित मकानों ( पीएम आवास सहित) और व्यक्तिगत जल स्रोतों का सर्वे न होना एक बड़ी प्रशासनिक चूक है।
प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि प्रभावित परिवारों ने बार-बार गुहार लगाने के बावजूद सुध नहीं ली गई है। विस्थापितों ने इसे अपना न्यायोचित अधिकार बताते हुए मांग की है कि एक उच्च-स्तरीय संयुक्त टीम सर्वे सुनिश्चित करे। आंदोलन की अगली कड़ी में खदान का मुख्य द्वार अवरुद्ध करने की चेतावनी दी गई है, जिसके उपरांत किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए सीधे तौर पर विभाग जिम्मेदार होगा।



