धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ के सिविल अस्पताल से सामने आया एक वीडियो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक अज्ञात महिला की इलाज के दौरान मौत के बाद उसका शव कथित तौर पर घंटों तक चिकित्सा वार्ड में ही बिस्तर पर पड़ा रहा। सबसे पीड़ादायक तस्वीर यह रही कि उसी वार्ड में भर्ती मरीज और उनके परिजन शव के पास बैठकर भोजन करने को मजबूर दिखाई दिए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद सिविल अस्पताल पहुंचे भाजपा मंडल महामंत्री एवं पूर्व सैनिक भोगेश्वर बेहरा, नवनियुक्त एल्डरमैन नीरज अग्रवाल, भाजयुमो अध्यक्ष धरमजयगढ़ समय अग्रवाल तथा पार्षद जानू सिदार ने मामले पर नाराजगी जताई। नेताओं ने ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को तत्काल अस्पताल पहुंचने के लिए कहा।
बताया जा रहा है कि बीएमओ के अस्पताल पहुंचने में देरी को लेकर भी भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई। इसी दौरान अस्पताल की अव्यवस्थाओं और वायरल वीडियो में शव के पास मरीजों के भोजन करने के मामले को लेकर पूर्व सैनिक भोगेश्वर बेहरा और बीएमओ के बीच तीखी बहस हुई।
बीएमओ ने बताया ‘कम्युनिकेशन गैप’
इस मामले पर बीएमओ ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें महिला की मौत की सूचना समय पर नहीं मिल पाई। उन्होंने इसे अस्पताल स्टाफ के बीच संवाद और समन्वय की कमी बताया तथा कहा कि जानकारी मिलते ही आवश्यक कार्रवाई की गई। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी मरीज की मौत की सूचना समय पर जिम्मेदार अधिकारी तक नहीं पहुंचना महज ‘कम्युनिकेशन गैप’ कहकर खत्म किया जा सकता है? अस्पताल में किसी मरीज की मौत कोई सामान्य प्रशासनिक सूचना नहीं होती। यह ऐसी स्थिति है जिसमें तत्काल कार्रवाई, शव की सुरक्षा, परिजनों की सूचना, आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और मानवीय गरिमा—सभी का ध्यान रखना जरूरी होता है। ऐसे में सूचना तंत्र की कथित विफलता भी अपने आप में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का विषय बनती है।
वायरल वीडियो मेें अव्यवस्था की तस्वीर
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू वह वीडियो है जिसमें एक तरफ महिला का शव पड़ा दिखाई देता है और दूसरी ओर मरीज एवं उनके परिजन भोजन करते नजर आते हैं। सवाल यह है कि क्या अस्पताल प्रबंधन को इस स्थिति की जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो तत्काल व्यवस्था क्यों नहीं की गई? और यदि जानकारी नहीं थी तो अस्पताल की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है? यह घटना केवल एक शव के वार्ड में पड़े रहने का मामला नहीं है। यह उस व्यवस्था का आईना है जिसमें मरीज और उनके परिजन इलाज के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं पर निर्भर रहते हैं और मौत के बाद भी मानवीय गरिमा की उम्मीद करते हैं।
कब होगी जवाबदेही तय?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा होता है। ऐसे में वहां इस तरह की घटना सामने आना बेहद गंभीर है। लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, यह पता लगाया जाए कि महिला की मौत के बाद शव को वार्ड से हटाने में देरी क्यों हुई, किस स्तर पर सूचना का आदान-प्रदान नहीं हुआ और इस दौरान ड्यूटी पर कौन-कौन कर्मचारी मौजूद थे।
जनता को केवल जुबानी सफाई नहीं, जवाब चाहिए
इस मामले में यदि गलती हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि व्यवस्था में कमी है तो उसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए। क्योंकि अस्पताल में इलाज कराने वाला हर व्यक्ति केवल दवा नहीं, बल्कि सम्मान, संवेदना और सुरक्षित व्यवस्था का भी हकदार है। मौत के बाद किसी इंसान की देह को इस तरह वार्ड में पड़े रहने देना और उसके आसपास दूसरे मरीजों का भोजन करना—यह दृश्य किसी भी संवेदनशील समाज को झकझोर देने के लिए काफी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस घटना को महज ‘कम्युनिकेशन गैप’ मानकर आगे बढ़ जाता है या फिर जिम्मेदारी तय कर ऐसी व्यवस्था बनाता है, ताकि भविष्य में किसी मृतक को भी अस्पताल की अव्यवस्था का शिकार न होना पड़े।
डॉक्टर व सफाईकर्मी को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी
सिविल अस्पताल धरमजयगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी और अत्यंत संवेदनशील लापरवाही सामने आई है। अस्पताल में उपचार के दौरान एक महिला मरीज की मृत्यु हो जाने के बाद भी उसके शव को नियमानुसार मरचुरी (शवगृह) में स्थानांतरित नहीं किया गया। इसके बजाय, मृतदेह को काफी समय तक जनरल महिला वार्ड में ही अन्य भर्ती मरीजों के बीच रखा रहने दिया गया। इस घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया तथा दूरभाष के माध्यम से तुरंत अस्पताल प्रशासन को सूचित किया।
जनप्रतिनिधियों की शिकायत मिलते ही प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल धरमजयगढ़ ने तत्काल महिला वार्ड का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मृतक मरीज का शव जनरल महिला वार्ड में ही रखा हुआ मिला। इस गंभीर चूक और संवेदनहीनता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन द्वारा त्वरित अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की गई है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने इस पूरी घटना को शासकीय कार्य में गंभीर लापरवाही मानते हुए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। विदित हो कि इस घटना को लेकर भाजपा नेताओं भोगेश्वर बेहरा , पार्षद जानू सिदार, एल्डरमैन नीरज अग्रवाल सहित अन्य लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के सामने कड़ी आपत्ति और विरोध जताया था, उनकी इसी पहल का असर है कि घटना के कुछ समय बाद ही सम्बंधित लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी की गई है ! चिकित्सा अधिकारी (अनु.) डॉ. कुशाल सिंह को पत्र क्रमांक 297, दिनांक 22/08/2026 के माध्यम से मरीज की मृत्यु के बाद भी शव को मरचुरी वार्ड में शिफ्ट न कराने तथा कार्य में उदासीनता बरतने पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। वहीं सफाईकर्मी श्री रामानंद सारथी को पत्र क्रमांक 299, दिनांक 22/08/2026 के माध्यम से शासकीय कार्य को गंभीरता से न लेने के संबंध में जवाब तलब किया गया है तथा पूछा गया है कि क्यों न उन्हें सेवा से पृथक करने हेतु उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जाए। अस्पताल प्रशासन ने दोनों कर्मचारियों को पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर लिखित एवं संतोषजनक जवाब प्रस्तुत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। संतोषप्रद जवाब न मिलने या समय पर जवाब प्रस्तुत न करने की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए संबंधित कर्मचारी स्वयं जिम्मेदार होंगे। इस संपूर्ण मामले की प्रतिलिपि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), रायगढ़ को भी आवश्यक सूचनार्थ प्रेषित कर दी गई है।



