जशपुरनगर। राजमाता देवेन्द्र कुमारी सिंह देव मेडिकल कॉलेज में एक आरक्षक की मौत के 42 दिन बाद ‘स्वस्थ होकर घर लौटने’ का शुभकामना संदेश उसके मोबाइल पर पहुंचने का मामला सामने आया है। मामले में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने कार्रवाई करते हुए कंप्यूटर ऑपरेटर वीरेंद्र बारिक को हटा दिया है। घटना के बाद मृतक आरक्षक की पत्नी ने पूरे मामले की जांच कराने और सिस्टम में सुधार की मांग की है। कांसाबेल थाने में पदस्थ आरक्षक देवनारायण राम (39) को पैर में सूजन और दर्द की शिकायत के बाद 26 जून को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रेफर किया गया। पत्नी सीमा कुजूर ने उसी दिन उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान 30 जून को उनकी मौत हो गई। इसके बावजूद 6 अगस्त को दोपहर करीब ढाई बजे देवनारायण के मोबाइल नंबर पर मेडिकल कॉलेज से उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौटने पर शुभकामना देने वाला संदेश पहुंच गया। संदेश देखकर पत्नी सीमा कुजूर हैरान रह गईं। मृतक की पत्नी सीमा कुजूर खुद दुलदुला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नर्स हैं। उन्होंने कहा कि पति की मौत के बाद परिवार धीरे-धीरे इस दुख से उबरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इस तरह का संदेश मिलने से मानसिक पीड़ा और बढ़ गई। सीमा ने कहा कि अगर सिस्टम से चूक हुई है तो उसे स्वीकार कर सुधार किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी दूसरे पीडि़त परिवार को ऐसी स्थिति से न गुजरना पड़े। उन्होंने मामले की गहन जांच की मांग की है।
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि यह मामला कंप्यूटर ऑपरेटर वीरेंद्र बारिक द्वारा ऑटो-जनरेटेड मैसेज के गलत संचालन से जुड़ा है। प्रबंधन के अनुसार ऑपरेटर को हटा दिया गया है। प्रबंधन ने यह भी कहा कि आयुष्मान योजना के तहत क्लेम प्रोसेसिंग में अलग-अलग चरणों में क्वेरी जनरेट होती है और उनके जवाब में दस्तावेज अपडेट करने की प्रक्रिया में सामान्यत: 8 से 10 दिन लगते हैं। डाटा एंट्री ऑपरेटर की ओर से क्लेम की निगरानी में देरी के कारण जानकारी 42 दिन बाद जनरेट हुई और सिस्टम में दर्ज मोबाइल नंबर पर ऑटो-जनरेटेड संदेश चला गया।
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के अनुसार आयुष्मान कार्ड से इलाज के दौरान मृतक देवनारायण के खाते में 16,700 रुपए की बिलिंग हुई थी और खाते में 4,74,800 रुपए की राशि शेष थी। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि आयुष्मान पैकेज से बिलिंग के लिए बायोमेट्रिक और मोबाइल ओटीपी जरूरी होता है, इसलिए मृत्यु के बाद उनकी ओर से बिलिंग करना संभव नहीं है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मृत्यु और रेफरल वाले मामलों में मरीज की वास्तविक स्थिति के अनुसार ऑटो-जनरेशन संदेश की प्रक्रिया में सुधार के लिए आयुष्मान योजना के राज्य नोडल को पत्र लिखा है। प्रबंधन का कहना है कि भविष्य में ऐसी तकनीकी या प्रक्रियागत त्रुटियों को रोकने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे।



