बिलाईगढ़। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बिलाईगढ़ नगर पंचायत से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो झूठी शिकायतें कर अधिकारियों को फंसाने वालों के मुंह पर एक करारा तमाचा है। काम में घोर लापरवाही बरतने पर जब स्वच्छता दीदियों को नौकरी से निकाला गया, तो अपनी बौखलाहट मिटाने और ब्लैकमेल करने के लिए उन्होंने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सुशील चौधरी पर उत्पीडऩ और अभद्रता के घिनौने आरोप मढ़ दिए। लेकिन सत्य की जीत हुई; प्रशासन और छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की गहन जांच में इन महिलाओं के गंदे मंसूबों की पोल खुल गई है और अधिकारी को पूरी तरह से दोषमुक्त करार दिया गया है।
7 दिन बाद याद आया तथाकथित ‘उत्पीडऩ’
शिकायतकर्ताओं की साजिश का पर्दाफाश इसी बात से हो जाता है कि जब उन्हें काम से निकाल दिया गया, उसके 7 दिन बाद उन्हें अचानक याद आया कि उनके साथ गाल-गलौज और छेड़छाड़ हुई है। शराब के नशे में जातिसूचक गालियां (नीच, सुअर, गोबर) देने, रात में मीटिंग के बहाने घर बुलाकर अश्लील हरकतें करने और अंडरवियर/इनर पहनकर मीटिंग लेने जैसे बेहद गंभीर और घटिया आरोप केवल अधिकारी की छवि खराब करने के लिए गढ़े गए थे। एसडीएम की जांच में यह साफ हो गया कि यह पूरी शिकायत दबाव बनाकर निष्कासित किये गये कार्यों को पुन: पाने का एक असफल और विवेकहीन प्रयास मात्र था। मिशन क्लीन सिटी के जिला समन्वयक शुभम नायक और सफाई दरोगा बहादुर कहार ने भी स्पष्ट गवाही दी कि महिलाओं के साथ कभी कोई अभद्रता नहीं हुई, बल्कि सीएमओ द्वारा हमेशा एक पारिवारिक और सम्मानजनक वातावरण में कार्य कराया जाता था।
राज्य महिला आयोग ने दिया करारा जवाब, प्रकरण हमेशा के लिए नस्तीबद्ध
इन झूठे आरोपों का अंतिम संस्कार छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग में हुआ। 06 जुलाई 2026 को आयोग की अध्यक्ष श्रीमती किरणमयी नायक के समक्ष हुई सुनवाई में शिकायतकर्ताओं का सारा झूठ सामने आ गया। महिला आयोग ने पाया कि ये सफाई कर्मचारी किसी बाहरी व्यक्ति या संस्था के बहकावे में आकर बार-बार यह झूठी शिकायत कर रही थीं। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कलेक्टर और एसडीएम की जांच रिपोर्ट से यह पूरी तरह प्रमाणित होता है कि सीएमओ पर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद, निराधार एवं असत्य हैं। महिलाओं की इस कुत्सित चाल को नाकाम करते हुए महिला आयोग ने इस झूठे प्रकरण को हमेशा के लिए नस्तीबद्ध (बंद) कर दिया है। यह फैसला उन तमाम लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो अपनी नाकामियों को छुपाने और ईमानदार अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए महिला सुरक्षा कानूनों का दुरुपयोग करने से बाज नहीं आते।
काम से निकाले जाने की बौखलाहट में रची गई थी मनगढ़ंत कहानी
एसडीएम बिलाईगढ़ की जांच रिपोर्ट (पत्र क्रमांक 339/अ.वि.अ./वा-2/2025) ने शिकायतकर्ताओं के झूठ की धज्जियां उड़ा दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार- प्रेरणा स्वच्छता समूह की ये महिलाएं अपने काम में लगातार स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता दिखा रही थीं। समूह द्वारा राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (हृत्रञ्ज) के आदेशों का सीधा उल्लंघन किया जा रहा था और बार-बार समझाइश देने के बावजूद वे काम में कोई सुधार नहीं कर रही थीं। हद तो तब हो गई जब भारत सरकार के महत्वपूर्ण ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ से ठीक 4 दिन पहले इन महिलाओं ने बिना किसी पूर्व सूचना के शहर की साफ-सफाई का काम पूरी तरह से ठप्प कर दिया। शहर की अति-आवश्यक सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए, सीएमओ ने मजबूरी में 05 मार्च 2025 को नोटिस चस्पा कर मुनादी कराई और इस लापरवाह समूह को अनुबंधित कार्य से विधिवत पृथक कर नए समूह (जय मां समलाई) को काम सौंप दिया।



