सुकमा। कभी दुर्दांत नक्सली कमांडरों पापाराव और नागेश के प्रभाव तथा गांव के बीच बने बड़े नक्सली स्मारक के कारण पूरे क्षेत्र में भय का प्रतीक रहा सुकमा जिले का ग्राम पंचायत पालाचलमा आज नक्सलमुक्त होकर विकास की नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ रहा है। जिला मुख्यालय से लगभग 170 किलोमीटर दूर दुर्गम पहाडिय़ों के बीच बसे इस गांव में पहली बार राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं अधिवक्ता दीपिका शोरी ग्रामीणों के बीच पहुंचीं। गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने पारंपरिक ढंग से ढोल-नगाड़ों, लोकनृत्य और बैंड-बाजे के साथ उनका आत्मीय स्वागत किया तथा स्थानीय आराध्य देवी माता मुतेलम्मा के मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
कोई औपचारिकता नहीं सीधा संवाद
इसके बाद दीपिका शोरी ने किसी औपचारिक मंच के बजाय ग्रामीणों के बीच बैठकर पुजारी, पेरमा, पटेल, सरपंच, पूर्व सरपंच, महिलाओं और युवाओं से सीधा संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों से पूछा कि क्या आज नक्सलमुक्त वातावरण में अपनी बात खुलकर रखना अच्छा लग रहा है या पहले, जब नक्सली जन अदालत लगाकर केवल अपनी बात सुनाते थे? इस पर पूरे गांव ने एक स्वर में कहा कि अब उन्हें खुलकर अपनी बात कहने और शासन-प्रशासन तक अपनी समस्याएं पहुंचाने का अवसर मिल रहा है, यही सबसे बड़ी आजादी है।
संवाद के दौरान ग्रामीणों ने वर्षों से झेली गई पीड़ा को सामने रखा। उन्होंने बताया कि नक्सलवाद समाप्त होने के बावजूद आज भी राशन लेने के लिए 9 किलोमीटर दूर किस्टाराम जाना पड़ता है, जबकि अब गांव तक यह सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2009 के आसपास नक्सलियों ने गांव की आश्रमशाला, आंगनबाड़ी और अन्य शासकीय भवनों को ध्वस्त कर दिया था। परिणामस्वरूप आज भी गांव के सौ से अधिक बच्चे शामशेट्टी, कोंटा, दोरनापाल, एर्राबोर और गादीरास जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। उन्होंने मांग की कि गांव में पुन: आश्रमशाला शुरू की जाए ताकि बच्चे अपने परिवार के बीच रहकर शिक्षा प्राप्त कर सकें।
सबसे बड़ी समस्या बिजली-गाँव से 9 किमी दूर आंखे कर रही इंतजार
ग्रामीणों ने बिजली की समस्या भी प्रमुखता से उठाई। किस्टाराम से पालाचलमा मार्ग पर आज भी मध्यप्रदेश काल के पुराने बिजली के खंभे खड़े हैं, जो इस बात की गवाही देते हैं कि कभी यहां भी विकास की रोशनी थी, लेकिन नक्सल हिंसा ने सब कुछ छीन लिया। अब गांव के लोग चाहते हैं कि उनके घर भी बिजली से रोशन हों, बच्चों को अंधेरे में पढ़ाई न करनी पड़े और गांव फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटे।
398 आवास सर्वे पूर्ण औपचारिकता पूर्ण होते मिलेगी स्वीकृति
पंचायत सचिव ने जानकारी दी कि शासन की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत गांव के 398 हितग्राहियों का सर्वे पूरा हो चुका है। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण होते ही स्वीकृति जारी कर दी जाएगी, जिससे प्रत्येक पात्र परिवार का पक्का मकान का सपना साकार होगा।
शासन की योजना बताकर दिलाया भरोसा
दीपिका शोरी ने ग्रामीणों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी देते हुए उन्हें अपने अधिकारों और सरकारी सुविधाओं के प्रति जागरूक किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नक्सलमुक्त क्षेत्रों में अब विकास की गति और तेज होगी तथा बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और राशन जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि पालाचलमा जैसे गांव अब भय के नहीं, बल्कि विकास के प्रतीक बनेंगे।
निर्माण कार्यों को भी देखा
दौरे के दौरान आयोग सदस्य ने गांव में चल रहे निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण किया और संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि वर्षों तक उपेक्षा झेल चुके इन गांवों को अब केवल गुणवत्तापूर्ण विकास ही मिलना चाहिए। राज्य महिला आयोग सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी ने कहा, पालाचलमा पहुंचकर मुझे महसूस हुआ कि यहां के ग्रामीण एक नवजात शिशु की तरह हैं। उन्हें अपने अधिकारों, कानून और शासन की योजनाओं की पूरी जानकारी नहीं है। हमारा दायित्व केवल उनकी समस्याएं सुनना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक बनाना भी है। मैंने ग्रामीणों को विश्वास दिलाया है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रभारी मंत्री केदार कश्यप, गृह मंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता नक्सलमुक्त क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोडऩा है। जिस तरह इस क्षेत्र को नक्सलवाद से मुक्ति मिली है, उसी तरह बहुत जल्द यहां बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सभी मूलभूत सुविधाएं भी पहुंचेंगी।
घर वापसी की अपील करते हुए धर्मांतरण से दूर रहने को कहा
कार्यक्रम के दौरान ही आयोग सदस्य को ज्ञात हुआ कि यहाँ लगभग 42 परिवार हैं जो दूसरे धर्म की ओर चले गए हैं,इस पर उन्होंने आदिवासी होने का लाभ बताते हुए कहा कि संविधान में हमें जो भी आरक्षण या लाभ मिल रहा है वो सब आदिवासी होने के ही कारण है आज जब सुकमा जिला नक्सलमुक्त हुआ है तो ऐसी शक्तियां हमारे क्षेत्रों में घुस रही हैं जो हमें भडक़ा कर दूसरे धर्म की ओर ले जा रही हैं जिससे आने वाले दिनों में निश्चित ही हमारा बहुत ज्यादा नुकशान होने वाला है,आप लोग किसी के बहकावे में न आएं और न ही किसी दूसरे धर्म में जाएं और जो चले गए हैं मैं उनसे उनकी बेटी बहन होने के नाते अपील कर रही हूं कि आप सब पुन: अपना घर वापसी करें और खुशहालीपुर्वक अपना जीवन यापन करें।



