रायपुर। वस्तु सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (डीजीजीजआई) रायपुर जोनल यूनिट ने करीब 6.93 करोड़ रुपए के फर्जी जीएसटी क्रेडिट (आईटीसी) मामले में कार्रवाई की है। टीम ने ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हरीश वाधवानी को रायपुर से गिरफ्तार किया है। हरीश 5 महीने से फरार चल रहा था। जांच में पता चला कि, कंपनी ने बिना माल खरीदे ही फर्जी बिलों के आधार पर करीब 7 करोड़ का टैक्स लाभ लिया। यह लाभ उन कंपनियों के जरिए लिया गया जो कागजों में तो मौजूद थीं, लेकिन वास्तव में काम नहीं कर रही थीं। 5 महीने पहले हरीश के भाई संतोष वाधवानी को भी 14 करोड़ की टैक्स चोरी मामले में अरेस्ट किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, हरीश वाधवानी पिछले करीब 5 महीने से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कई अदालतों में अग्रिम जमानत की कोशिश की, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से भी उसकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद डीजीजीआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया। डीजीजीआई के मुताबिक, जांच में पता चला कि कंपनी ने बिना वास्तविक माल खरीदे फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया और उसका इस्तेमाल भी किया। ओम किरण इस्पात उद्योग ने ऐसे कई कारोबारियों से बिल लिए, जिनके जीएसटी नंबर बाद में रद्द या सस्पेंड कर दिए गए थे। यह कार्रवाई एडिशनल डायरेक्टर जनरल सुजीत मलिक के नेतृत्व में की गई। अधिकारियों का कहना है कि, यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं हो सकता। जांच की जा रही है कि फर्जी बिलिंग का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच के आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। आसान भाषा में समझें तो जब कोई व्यापारी बिना सामान खरीदे या फर्जी बिलों के सहारे टैक्स में छूट का लाभ लेता है, तो उसे फर्जी आईटीसी कहा जाता है। इससे सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान होता है। फर्जी इनवॉइस जारी करना या लेना त्रस्ञ्ज कानून के तहत एक गंभीर अपराध माना जाता है। इसमें बिना असली सामान बेचे या सेवा दिए कागजों में बिल बनाया जाता है, ताकि टैक्स चोरी की जा सके। त्रस्ञ्ज कानून के अनुसार, इस तरह के मामले में जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।



