‘कुछ लोग थे जो वक्त के साँचों में ढल गये’
‘और कुछ लोग हैं कि वक्त के साँचे बदल गये’
आम जीवन में सामान्यतया अधिकांश लोग वक्त के साँचों में ढल जाते हैं क्योंकि जीवनी शक्ति विपरीत परिस्थितियों से लडऩे का माद्दा साधारण लोगों को नहीं देती है। वे चंद असाधारण शख्सियतें होती हैं, जिनमें वक्त के साँचे बदल देने की अद्भुत क्षमता,योग्यता व संकल्प शक्ति होती है। यह भी अनुभवजनित सत्य है कि ऐसे असाधारण लोग रोज जन्म नहीं लेते हैं। ऊपर वाला ऐसे लोगों को विशेष मिट्टी से गढ़ता होगा। संभवत: कुछ अति विशिष्ट कार्यों के संपादन हेतु ही नक्षत्रों का सर्वोत्कृष्ट योग बनाकर दिन विशेष में ऐसी अद्वितीय प्रतिभाओं को जन्म देता होगा। ओ पी चौधरी का मूल्यांकन उनके कृतित्व के आईने में किया जाये तो हम इसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगे कि वे इन्हीं असाधारण लोगों में शामिल हैं। ऊपर वाले ने उन्हें एक अलग ही प्रकार की विशिष्ट मिट्टी से गढ़ा है तथा उन्हें जन्म देने हेतु 2 जून 1981 का शुभ दिन तय किया।
आरंभिक जीवन में हिम्मत तोड़ देने वाली विषम परिस्थितियों से लडक़र उन्होंने न केवल अपनी शिक्षा पूर्ण की वरन देश के सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक पद को हासिल करने का असंभव लगने वाला सपना भी पाल लिया। इस सपने को पूरा करने के संकल्प को लेकर वे दिल्ली पहुंचे। लक्ष्य हासिल करने के दृढ़ संकल्प व तनतोड़ मेहनत के बलबूते पर वे मात्र 24 वर्ष की अल्प आयु में आई ए एस की सर्वाधिक कठिन परीक्षा पास करने वाले छत्तीसगढ़ के सबसे युवा प्रतिभा बनकर वापस लौटे। उनका सार्वजनिक जीवन वर्ष 2005 बैच के आई ए एस अधिकारी के रूप में शुरू हुआ। प्रशासनिक जीवन में उन्होंने जनजातीय समाज के साथ ही निचले तबके के सामान्य लोगों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिये अपनी मौलिक कल्पनाशीलता व विलक्षण सोच से ऐसी अभूतपूर्व योजनायें लागू की जिसकी गूंज राष्ट्रीय स्तर पर सुनी गयी और अपनी अनूठी योजनाओं के लिये प्रधानमंत्री के हाथों से पुरुष्कृत होकर उन्होंने प्रदेश व रायगढ़ जिले का मान बढ़ाया। प्रशासनिक जीवन के सफलतम 13 वर्ष ही पूर्ण हुये थे कि ओ पी चौधरी ने इस आकर्षक नौकरी से त्यागपत्र देकर राजनीति के कंकरीले धरातल पर पैर रखने का अप्रत्याशित व जोखिम भरा निर्णय लिया। न्यूनतम तैयारियों के साथ लड़े गये पहले चुनाव में पराजित होने के बावजूद उनका हौसला बरकरार रहा और पूरे पाँच वर्षों तक रायगढ़ से लेकर दंतेवाड़ा तक अनथक यात्रा करते हुये उन्होंने विपक्षी संघर्ष को जि़ंदा रखा। उनके इसी संघर्ष के कारण वर्ष 2023 के चुनाव में रायगढ़ की जनता ने उन्हें 64443 मतों के भारी अंतर से चुनकर विधानसभा भेजा और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने का मार्ग भी प्रशस्त किया। गृहमंत्री अमित शाह ने बड़ा आदमी बनाने के अपने वादे को पूरा करते हुये ओ पी चौधरी को वित्तमंत्री के साथ ही वाणिज्यिक कर, आवास एवं पर्यावरण, योजना,आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग का महती दायित्व सौंपा। समय साक्षी है कि शपथ ग्रहण से लेकर आज तक वे मोदी की गारंटी के एक-एक वादे को पूरा करने हेतु अपना पल-पल खपा रहे हैं। एक बड़े आदमी की शैली में नहीं वरन एक जमीन से जुड़े प्रतिनिधि की तरह वे रायगढ़ विधानसभा के कायाकल्प हेतु एक के बाद एक महत्वाकांक्षी योजनाओं को मूर्तरूप देने में दिन-रात एक कर रहे हैं। उनकी अगुवाई में रायगढ़ विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वर्ष 2005 से 2026 के बीच मात्र दो दशक का उनका यह सफरनामा एक रोमांचित कर देने वाली अकल्पनीय गाथा से कम नहीं है। इन्हीं क्रिया-कलापों के बरक्स उनकी जीवनयात्रा के संदर्भ में हम यह कह सकते हैं कि ऊपर वाले ने उन्हें विशिष्ट कार्यों के संपादन हेतु ही गढ़ा है।
आज ओ पी चौधरी का जन्मदिन है। इस जन्मदिन पर उन्हें हृदय से अशेष शुभकामनाएं। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वे उनकी क्रियाशीलता को बनाये रखें और उन्हें ऐसी शक्ति प्रदान करें कि उनकी अगुवाई में हमारा यह क्षेत्र और छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रगति व खुशहाली के नित नए आयाम तय करता रहे। पुन: एक बार जन्मदिन पर आत्मीय शुभकामनाएं….. मुकेश जैन



