बरमकेला। सहका. विभाग में छोटी मछलियों पर जाल फेंकने और बड़ी मछलियों को अभयदान देने का खेल क्या अब भी जारी है? यह सवाल इन दिनों बरमकेला क्षेत्र की जनता और किसानों के बीच तैर रहा है। हाल ही में सेवा सहकारी समिति साल्हेओना में धान खरीदी की गड़बडिय़ों पर हुई त्वरित कार्रवाई ने जहाँ एक ओर सुर्खियाँ बटोरीं, वहीं दूसरी ओर सेवा सहकारी समिति बड़े नावापारा पर प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी ने कई गंभीर सवालों को जन्म दे दिया है। ?अनेकों बार समाचार पत्रों में खबरें छपने और स्थानीय स्तर पर शिकायतें होने के बावजूद, बड़े नावापारा समिति के खिलाफ अब तक किसी भी ठोस जांच या कार्रवाई का न होना, उच्च अधिकारियों और रसूखदारों के बीच कथित सांठगांठ की ओर साफ इशारा कर रहा है।
क्षेत्र में इन दिनों एक नई राजनीतिक सुगबुगाहट ने जोर पकड़ लिया है। चर्चाओं और सूत्रों के बाजार के मुताबिक, बड़े नावापारा सेवा सहकारी समिति प्रबंधक कीर्तन चौहान से जुड़े रसूखदार परिवार की सदस्य और जनपद अध्यक्ष डॉ. विद्या किशोर चौहान के भाजपा में प्रवेश करने की तैयारियां चल रही हैं। विपक्ष और स्थानीय जनता के बीच यह तीखा सवाल उठ रहा है कि क्या साल्हेओना समिति पर की गई कार्रवाई महज एक दिखावा थी ताकि बड़े नावापारा के 3,95,00000 (तीन करोड़ पंचानबे लाख रुपये) के कथित महाघोटाले से ध्यान भटकाया जा सके? गलियारों में यह चर्चा आम है कि क्या इस राजनीतिक प्रवेश के बाद इस भारी भरकम राशि के गड़बड़झाले को क्लीन चिट की वाशिंग मशीन में धोकर साफ कर दिया जाएगाक्या सत्ताधारी दल अपनी साख बचाने के लिए इस कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर इस मामले पर भी ‘राजनीतिक पर्दा’ डाल दिया जाए। एक तरफ जहाँ समिति के रसूखदारों को बचाने के कथित प्रयास चल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ठगे गए किसानों का आक्रोश अब दस्तावेजों की शक्ल में सामने आने लगा है। ग्राम विक्रमपाल के निवासी किसान ताराचंद पटेल (पिता स्व. फगु लाल पटेल) ने छ.ग. सहकारी बैंक (अपैक्स) शाखा बरमकेला के प्रबंधक को पत्र लिखकर इस पूरे नेक्सस को चुनौती दी है। किसान ने अपने पत्र के माध्यम से सेवा सह. समिति बड़े नावापारा के संबंध में अत्यंत संवेदनशील जानकारियां मांगी हैं-किसानों द्वारा जमा शेयर राशि का पूरा ब्यौरा और उसकी पावती की छाया प्रति। वर्ष 23- 24, 24-25, 25-26 की धान खरीदी में मिली कमीशन राशि का प्रति वर्षानुसार मदवार आय-व्यय का विवरण।
किसान का यह पत्र यह साफ करता है कि जमीन पर पसीना बहाने वाला अन्नदाता अब अपने हक के एक-एक पैसे का हिसाब मांगने के लिए लामबंद हो रहा है। यदि साल्हेओना समिति में हुई कार्रवाई निष्पक्ष थी, तो बड़े नावापारा के मामले में प्रशासन के हाथ क्यों कांप रहे हैं? प्रबंधक कीर्तन चौहान द्वारा 3. 95 करोड़ की यह कथित वित्तीय अनियमितता सीधे तौर पर गरीब किसानों के हक पर डाका है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच बैठाकर किसानों को न्याय दिलाता है, या फिर यह मामला भी राजनीति की भेंट चढक़र ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
बड़े नावापारा सहकारी समिति- 3.95 करोड़ के कथित महाघोटाले पर मौन क्यों?
साल्हेओना पर गाज, तो यहाँ मेहरबानी क्यों?



