शिव महापुराण कथा में गणेश एवं कार्तिकेय जन्म प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
रायगढ़। दुर्गा मंदिर, सेठी नगर के पीछे आयोजित शिव महापुराण कथा में आज श्रद्धा एवं भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पूज्य पं. मोहन कृष्ण तिवारी जी महाराज ने नारी धर्म उपदेश, भगवान कार्तिकेय जन्म तथा गणेश जन्म के दिव्य प्रसंगों का विस्तृत एवं मार्मिक वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा पंडाल ‘हर हर महादेव’ और ‘जय गणेश’ के जयघोष से गूंज उठा। कथा व्यास मोहन कृष्ण तिवारी ने अपने प्रवचन में कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति, ममता, त्याग एवं संस्कार का स्वरूप माना गया है। नारी ही परिवार, समाज और संस्कृति की वास्तविक आधारशिला है। माता पार्वती के चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि धैर्य, समर्पण और सेवा ही नारी के श्रेष्ठ गुण हैं, जिनसे परिवार एवं समाज में सुख-शांति बनी रहती है।
इसके पश्चात भगवान कार्तिकेय जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए पंडित मोहन कृष्ण तिवारी महाराज ने बताया कि देवताओं को तारकासुर के अत्याचारों से मुक्त कराने हेतु भगवान शिव के दिव्य तेज से कार्तिकेय जी का अवतार हुआ। उन्होंने देवताओं की सेना का नेतृत्व कर अधर्म का नाश किया और धर्म की विजय स्थापित की। कथा के दौरान भगवान गणेश जन्म प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। महाराज ने बताया कि माता पार्वती ने अपने उबटन से गणेश जी की रचना कर उन्हें द्वारपाल नियुक्त किया था। भगवान शिव को रोकने पर गणेश जी और शिवगणों के बीच युद्ध हुआ, जिसमें गणेश जी का मस्तक अलग हो गया। बाद में भगवान शिव ने हाथी का मस्तक लगाकर उन्हें पुनर्जीवन दिया तथा समस्त देवताओं में प्रथम पूज्य होने का वरदान प्रदान किया। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से आगामी कथा प्रसंगों में भी अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।



