रायगढ़। जिले के जंगलों में पानी की तलाश में वन्यप्राणी अब बस्तियों तक पहुंचने लगे हैं। इसी दौरान एक कोटरी (हिरण प्रजाति) गांव तक पहुंच गया, जहां कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। हमले में कोटरी गंभीर रूप से घायल हो गया। अपनी जान बचाने के लिए वह पास के एक घर के आंगन में घुस गया। बाद में वन विभाग ने उसे पकडक़र सुरक्षित जंगल में छोड़ा, लेकिन शाम को वह मृत अवस्था में जंगल में मिला। मामला रायगढ़ वन परिक्षेत्र का है।
जानकारी के अनुसार बुधवार को चिराईपानी क्षेत्र के जंगल से एक कोटरी पानी की तलाश में भटकते हुए बस्ती तक पहुंच गया, तभी कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। कुत्तों से बचने के लिए कोटरी गांव के निवासी मनोज डनसेना के घर के आंगन में घुस गया, लेकिन कुत्तों ने पीछा नहीं छोड़ा। इस दौरान ग्रामीणों ने स्थिति देखी और लाठी-डंडों की मदद से कुत्तों को भगाया। बताया जा रहा है कि हमले में कोटरी के पिछले पैरों में गंभीर चोट आई थी और वह भय के कारण कांप रहा था। ग्रामीणों ने घटना की सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वनकर्मी मौके पर पहुंचे और घायल कोटरी का पशु चिकित्सक से इलाज कराया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे देलारी जंगल में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया, ताकि वह प्राकृतिक वातावरण में रह सके। वन अमला की टीम उसकी निगरानी करने लगी। शाम को जब टीम ने निरीक्षण किया तो वह एक ही जगह बैठा मिला और हिल नहीं रहा था। पास जाकर जांच करने पर पता चला कि कोटरी की मौत हो चुकी है।
पोस्टमार्टम के बाद दाह संस्कार
शाम को मृत कोटरी को इंदिरा विहार लाया गया। अंधेरा होने के कारण उसके शव को सुरक्षित स्थान पर रखा गया। अगले दिन गुरुवार को पशु चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम किया। इसके बाद नियमानुसार शव का दाह संस्कार कर दिया गया।
रेंजर बोले-वन्यप्राणी काफी संवेदनशील होते हैं
रायगढ़ रेंजर संजय लकड़ा ने बताया कि कोटरी गांव तक पहुंच गया था और उस पर कुत्तों ने हमला किया था। इलाज के बाद उसे जंगल में छोड़ा गया और निगरानी भी की जा रही थी। शाम को वह मृत अवस्था में मिला। उन्होंने यह भी बताया कि कोटरी जैसे वन्यप्राणी काफी संवेदनशील होते हैं, ऐसे मामलों में अक्सर उनकी जान चली जाती है।



