बरमकेला। एक ओर जहां सरकार वृक्षारोपण के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर नपं बरमकेला में एक विशालकाय और वर्षों पुराने बरगद के पेड़ को सोची – समझी साजिश के तहत मारने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बस स्टैंड स्थित मुख्य मार्ग पर खड़े इस बरगद के पेड़ की जड़ों में आग लगाकर उसे सुखाने की कोशिश की जा रही है, ताकि इसे रास्ते से हटाया जा सके।
?स्थानीय निवासी तुलसीदास नायक ने जिला कलेक्टर और वन विभाग को सौंपे अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि – नगर पंचायत बरमकेला के बस स्टैंड के पास स्थित शासकीय भूमि पर एक प्राचीन बरगद का पेड़ है। नायक का आरोप है कि पास ही स्थित धरम वस्त्रालय के संचालक द्वारा अपने निर्माणाधीन भवन के सामने स्थित इस पेड़ को साजिश के तहत नुकसान पहुँचाया जा रहा है। पेड़ की जड़ों को पहले खोखला किया गया और फिर उसमें आग लगा दी गई ताकि पेड़ धीरे-धीरे सूख जाए। जब मैंने पेड़ बचाने के लिए वहां मिट्टी डलवाई और चबूतरा बनाने की कोशिश की, तो रातों-रात उस मिट्टी को भी वहां से गायब कर दिया गया।
शिकायत के बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी सारंगढ़ द्वारा मौके की जांच कराई गई। हालांकि 12 दिसंबर 25 को जारी वन विभाग की रिपोर्ट और मौके पर तैयार पंचनामा में एक अलग ही कहानी सामने आ रही है। वन विभाग के अनुसार ?बरगद का वृक्ष वर्तमान में अत्यंत वृद्ध और खोखला हो चुका है। यह पेड़ कभी भी गिर सकता है, जिससे राहगीरों और वाहनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है। ?मौके पर मौजूद पंचों ने भी सहमति जताई है कि सुरक्षा की दृष्टि से इसे हटाना आवश्यक हो सकता है। ?अब सवाल यह उठता है कि क्या पेड़ वाकई प्राकृतिक रूप से कमजोर हुआ है या फिर उसे पॉइजनिंग और जड़ों में आग लगाकर जान बूझकर कमजोर किया गया है ? शिकायतकर्ता तुलसी दास नायक ने स्पष्ट रूप से कलेक्टर से मांग की है कि पर्यावरण संरक्षण के हित में पेड़ काटने की अनुमति न दी जाए और आग लगाने वाले दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
फिलहाल, यह मामला कलेक्टर और मुख्य नपं अधिकारी के पास लंबित है। एक तरफ पर्यावरण प्रेमी पेड़ को बचाने की गुहार लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ विभाग इसे ‘खतरा’ बता रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मूक वृक्ष को न्याय दिलाता है या फिर यह विकास और रसूख की भेंट चढ़ जाता है।
बरमकेला बस स्टैंड के ऐतिहासिक बरगद को जिंदा जलाने की साजिश



