रायगढ़। एक तरफ जहा चैत्र नवरात्र को लेकर शहर सहित अंचल में धूम मची हुई है तो वहीं विगत दो दिनों से चैत छठ पूजा भी चल रहा है। ऐसे में मंगलवार शाम को चैती छठ के व्रती महिलाओं ने पूरी उत्साह और श्रद्धा के साथ अस्त होते सूर्य को पहला अघ्र्य देने के लिए नदी व तालाब के घाटों पर पहुंची थी, जहां मौसमी फलों के साथ भगवान सूर्य की पूजा करने के बाद डूबते सूर्य को अघ्र्य दिया।
उल्लेखनीय है कि छठ पर्व साल में दो बार मनाया जाता है, मुख्य रूप से कार्तिक माह में दीपवली के छठवे दिन भगवान सूर्य को अघ्य दिया जाता है तो वहीं चैत महिने में भी नवरात्र के छठवे दिन मनाया जाता है। इसको लेकर विगत चार दिनों से बिहार, पश्चिम बंगाल व झारखंड के लोग तैयारी में जुटे हुए थे। जो मंगलवार को छठ व्रतधारी महिलाओं ने दोपहर बाद अपने घरों से दौरा में मौसमी फलों व पूजन सामग्री सजाकर शहर के तालाब व केलो नदी स्थिति छठ घाट पर पहुंची थी। उनके साथ उनके परिजन एवं मोहल्ले के लोग छठ मइया के गीत गाते हुए उत्साह एवं श्रद्धा के साथ छठघाट पर पहुंच कर पूजा-अर्चना किया। इसके बाद व्रतियों ने घाट में उतर कर छठ मइया की अराधना करने के बाद सूर्य के अस्त होने के इंतजार में पानी के अंदर खड़े होकर छठ मइया से मनौती मांगती रही और अस्त होते सूर्य को देखकर व्रतियों ने पहला अध्र्य दिया। वहीं परिजन भी घाट में खड़े होकर छठ मइया के पारंपरिक गीतों से छठ पूजा का बखान करते नजर आए।
भक्ति में लीन रहे श्रद्धालु
छठ व्रत के नियमों का पालन करने वाले भक्त दोपहर पांच बजे से ही नियत स्थान पर पहुंंच कर सूप में रखे पूजन सामग्रियों को घाट किनारे रखकर पूजा-अर्चना शुरू कर दिए थे। इसके बाद वे पानी में खड़े होकर भगवान भास्कर की अराधना करने लगे। उसके बाद अस्त होते सूर्य को प्रथम अघ्र्य देकर व्रती अपने घरों की ओर रवाना हुए।
नदी घटों में की गई पूजा
मंगलवार को शहर के केलो नदी किनारे खर्रा घाट, जूटमिल घाट, बुढ़ी माई तालाब, निकले महादेव मंदिर तालाब सहित अन्य जगहों पर भक्त पहुंचे हए थे, लेकिन चैती छठ बहुत कम लोग करते हैं, इस कारण घाटों पर भीड़-भाड़ का माहौल नहीं रहा। वहीं व्रतियों ने बताया कि यहां पूजा करने के बाद पूरी-विधान से घर में भी पूजा करेंगे। इसके बाद रात में फलों को बदली कर फिर से सूपा को सजाया जाएगा और बुधवार को सुबह फिर से घाट पर पहुंचेगी, इसके बाद पूजा-अर्चना करते हुए उगते सूर्य देव की पूजा करने के बाद व्रत को समाप्त करेंगी।
देवी मंदिरों में हुई मां कात्यानी देवी की पूजा
मंगलवार को सुबह से ही माता की छठवां रूप मां कात्यानी देवी की भक्ती में श्रद्वालु लीन रहे। इस दौरान शहर के प्रसिद्ध बुढ़ी माई मंदिर, अनाथालय स्थित दुर्गा मंदिर, समलेश्वरी माता मंदिर व राजापारा स्थित समलाई माता के मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे थे जो पूजा के साथ अपने परिवार के सुख-समृद्धि के लिए माता से कामना किया। वहीं शाम के समय भी देवी मंदिरों में माता के आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे हुए थे। ऐसे में पिछले पांच दिनों से हर दिन मंदिरों में भीड़ देखी जा रही है।



