रायगढ़। जिले के लैलूंगा विकासखंड स्थित कोड़ासिया प्री-मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास में छात्राओं से रंगाई-पुताई कराने का वीडियो वायरल हुआ। जिसे जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया। आदिवासी विकास शाखा की ओर से जांच के आदेश जारी किए गए।
अधीक्षिका की तरफ से प्रस्तुत प्रतिवेदन की सत्यता की जांच के लिए त्रि-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। अब जांच पूरी होने के बाद वहां काम करने वाली महिला कर्मचारी पर कार्रवाई करते हुए उसे सस्पेंड कर दिया गया है।
जांच समिति में क्षेत्र संयोजक धर्मेन्द्र सिंह बैस, क्षेत्र संयोजक धनेश्वरी सिदार और नोडल अधीक्षक उमेश पटेल को शामिल किया गया। समिति को 28 फरवरी को छात्रावास पहुंचकर पूरे मामले की स्थल जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित तिथि पर टीम छात्रावास पहुंची। छात्राओं, गार्ड और अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए।
जांच के दौरान यह सामने आया कि, छात्रावास अधीक्षिका ने रंगाई-पुताई के लिए मजदूर लगाए थे। कुछ स्थानों पर रंग अधूरा रह जाने पर संबंधित कर्मचारियों को कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद अधीक्षिका अपनी नियमित ड्यूटी के लिए स्कूल चली गईं। इसी दौरान महिला कर्मचारी जेरेमिना केरकेट्टा छात्रावास के अंदर गईं और बच्चियों से रंगाई करने को कहकर उनका वीडियो बना लिया। बाद में यह वीडियो वायरल कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि उस समय छात्राओं के पास मोबाइल फोन नहीं थे। प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया कि संबंधित महिला कर्मचारी अपने कार्य में अक्सर अनुपस्थित रहती थीं और काम में लापरवाही की शिकायतें भी थीं। अधीक्षिका से तालमेल ठीक नहीं होने के कारण उन्हें बदनाम करने की नीयत से वीडियो वायरल कराने की बात जांच में सामने आई।
महिला कर्मचारी सस्पेंड
जांच रिपोर्ट विभाग को सौंपे जाने के बाद सहायक आयुक्त ने महिला कर्मचारी जेरेमिना केरकेट्टा को निलंबित कर खरसिया जनपद में अटैच कर दिया है। क्षेत्र संयोजक धर्मेन्द्र सिंह बैस ने बताया कि समिति की जांच के आधार पर कार्रवाई की गई है।



