जशपुरनगर। खरीफ की फसल कट चुकी है, खेत खाली हो चुके हैं और किसानों ने मवेशियों को खुला छोड़ दिया है। अब मवेशी खेतों के साथ-साथ सडक़ों पर घूम रहे हैं। मवेशी सिर्फ गांव की सडक़ों पर ही नहीं हैं, बल्कि नेशनल हाइवे-43 पर भी मंडरा रहे हैं। मवेशियों की वजह से एनएच-43 पर हालत यह है कि सडक़ पर गाडिय़ों की वजह से कम और मवेशियों के कारण ज्यादा जाम लग रहा है। गाडिय़ों जगह-जगह अटक रही हैं और हादसे का भी खतरा बना हुआ है। एनएच-43 पर गिरांग से लेकर शंख नदी पुल तक सडक़ पर मवेशियों का जायजा लिया। सडक़ पर 25 किमी तक 18 जगहों पर मवेशियों के चलते जाम की स्थिति सामने आई। गिरांग मोड़ पर ही बड़ी संख्या में मवेशी सडक़ और सडक़ किनारे नजर आए। वहीं घोलेंग पहुंचने से पहले दो जगह पर सडक़ किनारे मवेशी चर रहे थे। घोलेंग का चर्च गेट पार करने के बाद पांडुल मोड़ के पास भेड़ों का झुंड सडक़ पार हो रहा था। इसके बाद झरगांव नाला, झरगांव मोड़ के पास, आगडीह से पहले, महुआटोली के पास, टेकुल मोड़ के पास, रूपसेरा नदी के पास, भलमंडा चौक, भलमंडा जंगल में चार जगहों पर, भद्रकाली ढाबा के पास, कुल्डा गांव के पास दो जगहों पर, लोदाम घुसने से पहले, टोल प्लाजा पार करने के बाद, ग्राम साईंटांगरटोली के पास भी हमें मवेशी सडक़ पर घूमते नजर आए। अधिकांश जगहों पर मवेशी सडक़ किनारे पर चरते हुए देखे गए थे। कुछ जगहों पर चरवाहा मवेशियों को सडक़ किनारे हांकते हुए ले जा रहे थे। मवेशियों को सडक़ पर देखकर वाहन धीरे करने की जरूरत इसलिए भी पड़ती है क्योंकि मवेशी अचानक दौडक़र सडक़ के बीच आ सकते हैं। गाय-बैल के मामले में ऐसा कम होता है, पर बकरियों की झुंड के वजह से ऐसा खतरा हमेशा बना रहता है। कई दुर्घटनाओं की मुख्य वजह सडक़ पर मवेशी होते हैं।
धान कटाई के बाद पशुपालक अपने घरों में मवेशी बांधकर रखना बंद कर देते हैं। ठंड और बरसात दोनों ही खेती का ऑफ सीजन माना जाता है। पशुपालक अपने मवेशियों को रोजाना सुबह चरने के लिए छोड़ देते हैं। कई गांव में चरवाहे की व्यवस्था भी नहीं होती है। कई पशुपालकों के मवेशी चरकर रोज शाम घर लौट जाते हैं तो कई पशुपालकों को तीन चार दिन बाद अपने मवेशी ढूंढऩे भी पड़ते हैं। सडक़ किनारे बसे गांव में चारागाह की जमीन का भी अभाव है। हमें अक्सर जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को लेकर रांची या अंबिकापुर जाना पड़ता है। रेफर केस में मरीजों को जल्द से जल्द दूसरे अस्पताल पहुंचाना होता है। दिन में एनएच पर चलने के दौरान ट्रैफिक के अलावा मवेशियों की वजह से भी काफी ब्रेक लगाना पड़ता है। इससे हमें तय समय से ज्यादा वक्त पहुंचने में लग जाता है। यह कोई समस्या नहीं है। रात के वक्त सडक़ पर मवेशियों की समस्या कम होती है।
रफ्तार पर ब्रेक : नेशनल हाईवे पर 25 किमी तक मवेशियों का कब्जा



