रायपुर। एसआईआर (एसआईआर) प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने रायपुर के तहसील कार्यालय में प्रदर्शन दिया है। कांग्रेसी कार्यकर्ता तहसीलदार के केबिन में बैठ गए और विरोध जताया। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा की ओर से लाए गए 400 दावा-आपत्ति फॉर्म स्वीकार कर लिए गए, जबकि नियम के अनुसार एक समय में सिर्फ 30 से 50 फॉर्म ही लिए जा सकते हैं। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि तहसील कार्यालय में जमा किए गए 400 फॉर्म उन्हें दिखाए जाएं। तहसीलदार ने बताया कि जिस कर्मचारी ने फॉर्म स्वीकार किए हैं, वह फोन नहीं उठा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा के कहने पर लोगों के नाम काटे जा रहे हैं और उनके आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं।
इससे पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्ढ्ढक्र) प्रक्रिया में दावा-आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात की। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि वर्तमान में तय समय-सीमा के कारण बड़ी संख्या में पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित हो सकते हैं। कांग्रेस का कहना है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए शुरू की गई स्ढ्ढक्र प्रक्रिया लोकतांत्रिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके तहत दावा-आपत्ति की अवधि बेहद कम रखी गई है। इससे खासकर ग्रामीण, आदिवासी, दूरस्थ और पिछड़े इलाकों में रहने वाले नागरिकों को परेशानी हो रही है। कई स्थानों पर दस्तावेजों की उपलब्धता और तकनीकी कठिनाइयों के कारण लोग समय पर आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
कांग्रेस ने ज्ञापन में कहा है कि बस्तर जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और रोज़ी-रोटी के लिए बाहर काम करने वाले मजदूर मतदाताओं को वोट देने की प्रक्रिया में बड़ी कठिनाई हो रही है। कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटने का डर भी बना हुआ है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि पहले भी सुकमा और अन्य इलाकों से इस संबंध में शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जहां बिना पर्याप्त जानकारी और सहयोग के फॉर्म भरवाने की बातें सामने आई थीं। पार्टी का कहना है कि यदि दावा-आपत्ति की अवधि नहीं बढ़ाई गई, तो इससे मताधिकार जैसे संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल ने निर्वाचन आयोग ने मांग की है कि स्ढ्ढक्र प्रक्रिया में दावा-आपत्ति की अंतिम तारीख को बढ़ाया जाए, ताकि कोई भी योग्य नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे। कांग्रेस ने उम्मीद जताई है कि निर्वाचन आयोग लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए इस मांग पर सकारात्मक और जनहितकारी फैसला करेगा। 22 जनवरी के बाद आवेदन नहीं, सिर्फ सत्यापन छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए निर्वाचन आयोग 22 जनवरी से 21 फरवरी तक विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। सूची से कटे नाम, संशोधन इत्यादि की दावा आपत्तियों के अलावा 6.40 लाख मतदाता नो-मैपिंग वाले हैं। यानी बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) इन मतदाताओं तक पहुंच नहीं पाए।
इसकी मुख्य वजह उनका पता नहीं मिलना, घर बंद होना या लंबे समय से निवास न होना बताया जा रहा है। निर्वाचन आयोग ने ऐसे सभी नो-मैपिंग मतदाताओं को नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाता को निर्धारित समय सीमा के भीतर एसडीएम के समक्ष उपस्थित होकर 13 मान्य दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज पेश करना होगा।
इनमें आयोग की ओर से बताए गए 13 दस्तावेज शामिल हैं। एसडीएम स्तर पर दस्तावेजों की जांच के बाद ईआरओ (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) यह तय करेंगे कि मतदाता का नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाए या नहीं। यदि ईआरओ के निर्णय से मतदाता संतुष्ट नहीं होता है, तो उसे जिला कलेक्टर के पास अपील करने का अधिकार दिया गया है। अभी निर्वाचन आयोग एसआईआर के लिए 2003 की सूची को आधार बना रहा है। इसके तहत देखा जा रहा है कि मतदाता का नाम 2003 की सूची में है या नहीं। जिन लोगों के नाम 2003 की सूची में नहीं हैं, उन्हें अपने रिश्तेदारों के रेफरेंस देने पड़ रहे हैं। अगर किसी के रिश्तेदारों के नाम भी सूची में नहीं हैं, तो उन्हें सी कैटेगरी में डालकर अलग नोटिस भेजा गया। अब उनका नाम जोडऩे के लिए 13 तरह के दस्तावेजों में से कोई एक देना होगा। ये दस्तावेज कई लोगों के लिए देना आसान नहीं है। यही समस्या उन्हें अगले एसआईआर में फिर सामने आएगी।
भाजपा की मुख्य निर्वाचन अधिकारी से दावा-आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाने की मांग विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में नाम जोडऩे में लोगों को हो रही परेशानियों को लेकर भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत की है। सोमवार को भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इसमें ईआरओ और बीएलओ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा-आपत्ति की समय-सीमा 31 जनवरी तक बढ़ाने की मांग की गई है।
तहसील दफ्तर में कांग्रेस का प्रदर्शन, तहसीलदार के केबिन में बैठकर की नारेबाजी



