रायगढ़। राज्य शासन की सुशासन, पारदर्शिता एवं जनहितकारी प्रशासन की अवधारणा के अनुरूप रायगढ़ जिला प्रशासन द्वारा भू-अर्जन प्रकरणों में मुआवजा भुगतान प्रक्रिया को सुगम, सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एक अभिनव पहल की शुरुआत की गई है। जिला प्रशासन द्वारा यह नई व्यवस्था रायगढ़ अनुविभाग अंतर्गत 26 सितंबर 2025 से प्रभावशील की गई है।
इस पहल के तहत भू-अर्जन से प्रभावित किसानों को मुआवजा एवं पुनर्वास तथा बोनस की राशि सीधे ऑनलाइन बैंकिंग प्रक्रिया के माध्यम से उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होने के साथ-साथ किसानों को होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का भी समाधान हो रहा है।
जिला प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 26 सितंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 की अवधि में भू-अर्जन मुआवजा मद अंतर्गत कुल 92 प्रभावित किसानों को 8 करोड़ 66 लाख 57 हजार 210 रूपए का भुगतान किया गया है। वहीं पुनर्वास एवं बोनस मद अंतर्गत 224 किसानों को 5 करोड़ 46 लाख 25 हजार 599 रुपए की राशि का वितरण किया गया है। इस प्रकार मुआवजा एवं पुनर्वास दोनों को मिलाकर कुल 316 किसानों को 14 करोड़ 12 लाख 82 हजार 809 रुपए की राशि सीधे उनके खातों में अंतरित की गई है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भू-अर्जन प्रकरणों में मुआवजा राशि का भुगतान चेक के माध्यम से किया जाता था, जिससे किसानों को चेक प्राप्त करने, बैंक में लंबी प्रक्रिया, भुगतान में विलंब तथा बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। नई ऑनलाइन व्यवस्था से यह सभी बाधाएं समाप्त हो गई हैं।
किसानों को मिल रही हैं अनेक प्रत्यक्ष सुविधाएं
इस अभिनव व्यवस्था से जिले प्रभावित किसानों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। अब उन्हें न तो चेक लेने के लिए कार्यालय जाना पड़ता है और न ही बैंक में अनावश्यक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। मुआवजा एवं पुनर्वास राशि सीधे खातों में जमा होने से किसानों के समय और धन दोनों की बचत हो रही है। साथ ही डिजिटल भुगतान से लेन-देन का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध होने के कारण किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद की संभावना भी न्यूनतम हो गई है। ऑनलाइन भुगतान प्रणाली से किसानों को बिना किसी मध्यस्थ के पारदर्शी तरीके से राशि प्राप्त हो रही है, जिससे उनमें शासन एवं जिला प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। समय पर राशि मिलने से किसान अपनी कृषि एवं पारिवारिक आवश्यकताओं की योजना बेहतर ढंग से बना पा रहे हैं।




