रायगढ़। तमनार में धरना प्रदर्शन के दौरान महिला थाना प्रभारी सहित अन्य पुलिस कर्मियों से मारपीट और बदसलूकी के मामले में रायगढ़ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आखिरकार मुख्य आरोपी चित्रसेन साव को गिरफ्तार कर लिया और उसका का जुलूस निकाला। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अधिकारी और कर्मचारी का गुस्सा फूट पड़ा। आरोपी के मुंह पर कालिख पोती और जूते-चप्पलों का माला पहनाकर शहर के हेमू कालानी चौक से जुलूस निकाला और जमकर पटाखे फोडक़र पुलिस ने अपमान का जवाब दिया।
जानकारी के अनुसार गारे–पेलमा सेक्टर-1 कोयला खदान को लेकर 8 दिसंबर 2025 को धौराभांठा बाजार मैदान में जनसुनवाई आयोजित की गई थी। इसके विरोध में प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीणों द्वारा 12 दिसंबर से सीएचपी चौक, लिब्रा में आर्थिक नाकेबंदी कर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा था, जिससे आवागमन बाधित हो गया था।
वहीं 27 दिसंबर 2025 को जब पुलिस-प्रशासन मार्ग खुलवाने पहुंचा, तब प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और पुलिस बल पर हमला कर दिया। इस हिंसक घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हुए, वहीं महिला थाना प्रभारी और महिला आरक्षक के साथ मारपीट, गाली-गलौज, कपड़े फाडऩे और अभद्र व्यवहार जैसी गंभीर घटनाएं सामने आई।
घटना के बाद तमनार थाना में आरोपियों के खिलाफ धारा 109, 74, 76, 296, 351(2), 115 (2), 221, 132, 309(4), 309(6), 3(5) भा.न्या.सं. तथा आईटी एक्ट की धारा 67(ए) के अंतर्गत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया और अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर आरोपियों की तलाश तेज की। अब तक इस मामले में मुख्य आरोपी चित्रसेन साव सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में मंगल राठिया, चिनेश खमारी, प्रेमसिंह राठिया, कीर्ति श्रीवास (सभी निवासी ग्राम आमगांव) और वनमाली राठिया निवासी ग्राम झरना शामिल हैं। सोमवार को मुख्य आरोपी चित्रसेन को गिरफ्तार कर जुलूस निकाला गया।
कानून के दायरे में पुलिस महिला शक्ति ने निकाली भड़ास, मन को मिला सुकून
रायगढ़। 27 दिसंबर को तमनार में जो कुछ हुआ वह घटना अधर्म और नारी के अपमान का प्रतीक है। उस शर्मनाक घटना ने आज 5 जनवरी की पृष्ठभूमि तैयार की। आज रायगढ़ की सडक़ों पर जो दृश्य देखा गया वह महज एक आरोपी की गिरफ्तारी का नहीं बल्कि नारी के सम्मान और उसकी गरिमा बनाए रखने का प्रचंड आरंभ है। जो देश के कोने-कोने में पहुंचना चाहिए ताकि कुंठित मानसिकता के उस पुरुष वर्ग को इस बात का एहसास हो कि एक महिला का अपमान केवल उस महिला का अपमान नहीं बल्कि देश की आधी आबादी का नेतृत्व करने वाली सभी महिलाओं के लिए शर्मनाक क्षण होता है। महिला पुलिसकर्मी की वर्दी फाडक़र तमनार में शांतिपूर्ण आंदोलन की आड़ में जिस अपराध को अंजाम दिया गया उसने हर कामकाजी महिला को झकझोर कर रख दिया। वर्दीधारी महिला पुलिस अपना फर्ज निभाते हुए एक बेहद शर्मनाक पल से गुजरी है। वो रोती है, गिड़गिड़ाती है और उसी अर्धनग्न अवस्था में आरोपियों द्वारा उसका वीडियो बनाया जाता है। जिन लोगों ने भी उस घिनौने कृत्य को देखा आज उनकी आंखों को सुकून मिला। जब उस घटना के आरोपी को जूतों की माला में देखा गया। कभी अपने किए पर माफी मांगता, कभी उठक-बैठक करता। यह आरोपी उस पल को याद कर रहा होगा जब इसने महिला अस्मिता को तार-तार किया था। आज जिले की सभी महिला पुलिसकर्मियों के मन को भी बड़ा सुकून मिला होगा। जब खुद इन्होंने आरोपी को पैदल सडक़ों पर घुमाया। गुस्साई महिलाओं ने आरोपी के चेहरे पर काजल पोता, लाली लगाई और संदेश दिया कि लाली, काजल महिलाओं की ताकत है। महिलाओं की सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाई जाने वाली यह लाली ये काजल कुंठित मानसिकता वाले पुरुष वर्ग के चेहरे पर जब लगती है तो यह पता चलता है कि उस पुरुष का मन कितना कुरूप है, कितना विक्षिप्त है। महिला पुलिस आरक्षक का कहना है कि हम रात और दिन अपने परिवार को छोडक़र। आम जनता के लिए यहां मरते-जीते रहते हैं और कुछ घिनौनी मानसिकता वाले लोग इस तरह के बदसलुकी कर रहे हैं। जिसका पुलिस नारी शक्ति ने मुहतोड़ जवाब दिया है।
महिला आरक्षकों में शर्मनाक घटना के आरोपी की गिरफ्तारी की खुशियां साफ देखी गई। गले में जूतों की माला और चड्डी बनियान में पैदल चल रहे उस व्यक्ति पर महिलाओं का आक्रोश पनप रहा था और यह आक्रोश यह नाराजगी यह गुस्सा जायज भी। अपने मन की भड़ास पूरी करते हुए महिलाओं ने आरोपी का जुलूस निकाला और चक्रधरनगर थाने तक आरोपी को पैदल ही लेकर पहुंची। महिला आरक्षक का कहना है कि जो हमारे साथ हुआ उसको पूरी जनता जानती है। पूरी दुनिया जान चुकी है कि क्या हुआ क्या नहीं हुआ। उसको हम बता ही नहीं सकते जाहिर ही नहीं कर सकते। जो घटना हुई है वो बहुत शर्मनाक है। उसके बारे में बोलना भी गंदा लगता है और सुनना भी गंदा लगता है। लेकिन आज जो हुआ जो आरोपी था वो पकड़ा गया। उसका हमने जुलूस इसलिए निकाला क्योंकि हमारे मन को शांति मिले। वो जेल के अंदर चला गया। उसको कभी जमानत ही ना मिले। वह जिंदा जेल से बाहर मत आए। जिला पुलिस बल की महिलाओं ने आज के दिन को जश्न के रूप में मनाया। अपने घर परिवार, अपने छोटे बच्चों व परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को छोडक़र दिन रात सेवा में लगी रहने वाली महिला पुलिसकर्मियों ने खुद अपने लिए जिंदाबाद के नारे लगाए। पटाखे फोड़े और केक काटकर इस जश्न में शामिल हुई। इनके लिए कानून के दायरे में रहकर अपनी भड़ास निकालना भी बेहद जरूरी था। क्योंकि जिस तरह से आंदोलन की आड़ में हैवानियत का नंगा खेल-खेला गया। उसने पुलिस की नौकरी करने वाली महिलाओं को मानसिक आघात पहुंचाया था। दूसरों की रक्षा करने वाली पुलिस ही अगर असहाय हो जाएगी तो आम महिला अपनी रक्षा कैसे कर पाएगी? यह उन आम महिलाओं के लिए भी बेहद जरूरी था जिनके मन में तमनार की दरिंदगी का डर घर कर गया था। डर इस बात का कि जब महिला पुलिस को घेर कर उसके साथ ऐसी घिनौनी हरकत की जा सकती है तो हम कितने सुरक्षित हैं। लेकिन आज उन सभी महिलाओं के साथ पूरे देश में इस बात का संदेश भेजा जा चुका है कि जिस तरह अधर्म और नारी के अपमान ने महाभारत की पृष्ठभूमि लिखी और द्वापर युग का अंत हुआ। ठीक उसी तरह कलयुग में भी दुर्योधन जैसा दुस्साहस करने वाले को जूतों की माला पहनाई जाए। चेहरे पर काजल की कालिख पोती जाए और नंगे पांव पैदल चलाया जाए। शायद कलयुग के अंत की यही शुरुआत है जो आज रायगढ़ में हो चुकी है। आज हम लोग बहुत खुश हैं। हम लोग बहुत ईमानदारी से और बहुत निष्ठा से अपनी ड्यूटी करते हैं। हमारी साथी के साथ जो हुआ था आज उसके साथ इंसाफ हुआ। इस नाम से हम बहुत खुश हैं। हमें बहुत अच्छा लग रहा है।



