रायगढ़। शहर के राजापारा स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति के देवेश षडंगी ने बताया कि श्रीजगन्नाथ चेतना एवं गवेषणा केन्द्र के निर्देशानुसार 20-21 दिसंबर को पुरी श्रीजगन्नाथ धाम में दो दिवसीय जागरूकता शिविर एवं वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि कार्यकर्ताओं को महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के आविर्भाव, स्कंदपुराण में वर्णित विषयों, सेवा-पूजा,ज्ञान यात्रा, श्री मंदिर दर्शन, महाप्रसाद, श्री क्षेत्र,ज्ञान मंत्र,गुंडिचा मंदिर, आदि बहुत सारे गुढ विषयों, रहस्यों के विषयों पर दो दिवसीय संचेतना शिविर का आयोजन किया गया। इस प्रकार महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के विभिन्न विषयों के बारे में ज्ञान एकसाथ नहीं मिलता। इसमें विद्वान आचार्य माधवानंद सरस्वती जी,महंत श्री रामकृष्ण दास जी, श्री सच्चिदानंद दास जी,डॉ नरेश चंद्र दास जी, डॉ भास्कर मिश्र जी, डॉ आशुतोष मिश्र जी प्रमुख वक्ता थे।
21 दिसंबर की संध्या आमसभा में मुख्य अतिथि पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिह देव जी ने मार्गदर्शन देते हुए कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ के अन्य मंदिरों मे अमान्य नीतियों और परंपराओं को प्रश्रय न दें। भगवान श्रीजगन्नाथ की सेवा नीतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए, प्रतिष्ठान के सदस्यों को दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने कहा जैसे इस्कॉन वाले भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा को कभी भी निकालते हैं, जो अमान्य है और नीति विरुद्ध है। फिर भी हिन्दू संगठन चुपचाप हैं,वहीं अन्य किसी धर्म में होता तो अबतक उसके विरूद्ध आदेश निकल गया होता,तो हमारे धर्म और संस्कृति में इस प्रकार के अतिक्रमण क्यों हो रहे हैं। इस दो दिवसीय सम्मेलन में उडिसा के अलावे अन्य राज्यों के भी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिसमे छत्तीसगढ से रायगढ के श्रीजगन्नाथ मंदिर से इस ज्ञान शिविर में मुझे ही भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होने कहा हमें अपने धर्म और संस्कृति को बचाए रखने के लिए मंदिरों को स्थापित रीति नीति के अनुसार ही चलाना पडेगा।
श्री जगन्नाथ चेतना एवं गवेषणा प्रतिष्ठान का आयोजनद्व पुरी में 14 वां वार्षिकोत्सव



